Darbhanga News: दरभंगा. सीएम साइंस कॉलेज में हिंदी विभाग की ओर से 14 नवंबर को बाल दिवस पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी होगी. इसका विषय आधुनिक बाल साहित्यः नयी चुनौतियां एवं संभावनाएं है. संगोष्ठी का आयोजन ऑन एव ऑफ लाइन मोड में होगा. आयोजन सचिव डॉ दिनेश प्रसाद साह ने बताया कि बाल साहित्य समृद्ध और विविधतापूर्ण रहा है. वर्तमान में इसके समक्ष कई नयी चुनौतियां है. यह चुनौती मात्र प्रकाशकों और लेखकों के लिए ही नहीं, बल्कि बच्चों के पठन-पाठन, संस्कार और उनकी रचनात्मकता पर भी प्रभाव डाल रही है. मोबाइल, इंटरनेट और वीडियो गेम्स के बढ़ते प्रभाव ने बच्चों की पढ़ने की आदतों को अत्यधिक प्रभावित किया है. वे पुस्तकों की बजाय डिजिटल कंटेंट जैसेः यूट्यूब, वीडियो / वेब सीरीज और सोशल मीडिया की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जिससे बाल साहित्य की लोकप्रियता दिनानुदिन घट रही है. कहा कि अधिकांश प्रकाशकों का ध्यान व्यावसायिक लाभ पर केंद्रित है. इससे गुणवत्तापूर्ण बालसाहित्य का प्रकाशन कम हो रहा है.
समकालीन विषयों पर प्रभावी बालसाहित्य की कमी
कहा कि जलवायु परिवर्तन, विज्ञान, मानसिक स्वास्थ्य, डिजिटल सुरक्षा और लैंगिक समानता जैसे समकालीन विषयों पर प्रभावी बालसाहित्य की कमी है. कई स्थापित लेखक वयस्क साहित्य की ओर ही समर्पित होते हैं. वे बाल साहित्य-लेखन को गंभीर साहित्य के रूप में कम महत्व देते हैं. इससे नए लेखकों को प्रेरणा कम मिलती है और इस विधा में नवीनता की कमी हो रही है.बाल साहित्य को बढ़ावा देने में ठोस नीति की कमी
कहा कि बालसाहित्य को बढ़ावा देने के लिए ठोस नीति नहीं है. नेशनल बुक ट्रस्ट और चिल्ड्रन बुक जैसे संस्थान सीमित संसाधनों के साथ काम कर रहे हैं. इससे बालसाहित्य के व्यापक प्रचार प्रसार में बाधा आती है. स्कूलों में अब बाल साहित्य को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की प्रवृत्ति घट रही है. संगोष्ठी में इसके समाधान के लिए लेखकों और शोधार्थियों द्वारा रास्ता दिखाया जायेगा.मुख्य सहित 30 उप विषयों पर शोध आलेख आमंत्रित
कहा कि मूल विषय के साथ 30 उप विषय पर शोध आलेख आमंत्रित किया गया है. उप विषयों में बालसाहित्य और नैतिक शिक्षा, चरित्र निर्माण में बाल साहित्य की भूमिका, द्विवेदी युग और बालसाहित्य, प्रेमचंद की कहानियों में बालसाहित्य की झलक, भारतेंदु काल में बालसाहित्य के अंकुर, बाल कल्याण एवं बालसाहित्य शोध केंद्र की उपादेयता, आचार्य रामलोचन शरण और बालक, पुस्तक भंडार लहेरियासराय का बालसाहित्य में अवदान, बालसाहित्य का संरक्षण, संवर्धन और पुस्तकालय, 21वीं सदी में बालसाहित्य की स्थिति, बच्चों के सर्वांगीण विकास में मैथिली बाल पत्रिकाओं की भूमिका, बच्चों के सर्वांगीण विकास में अंग्रेजी बाल पत्रिकाओं की भूमिका, बच्चों के सर्वांगीण विकास में हिंदी बाल पत्रिकाओं की भूमिका आदि शमिल है.कुलपति बनाये गये संगोष्ठी के मुख्य संरक्षक
संगोष्ठी के मुख्य संरक्षक लनामिवि के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी, संरक्षक सह अध्यक्ष प्रधानाचार्य प्रो. संजीव कुमार मिश्र, परामर्शक डॉ प्रभाकर पाठक होंगे. मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के सदस्य बलदाऊ राम साहू, मुख्य वक्ता बाल साहित्यकार भगवती प्रसाद द्विवेदी, विशिष्ट अतिथि मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ विकास दुबे, बीज वक्ता डॉ दिनेश प्रसाद साह तथा विशिष्ट वक्ताओं में अखिल भारतीय हिंदी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ विजयानंद, उत्तराखंड बाल प्रहरी के संपादक उदय किरोला, संयुक्त अरब अमीरात के भूपेंद्र कुमार, अमेरिका निवासी बाल साहित्यकार डॉ विमला जोशी होंगे. आयोजन सचिव डॉ दिनेश प्रसाद साह, संयोजक डॉ युगेश्वर साह, संयुक्त आयोजन सचिव लनामिवि के पीजी हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार, समन्वयक डॉ सत्येंद्र कुमार झा एवं सह समन्वय डॉ ऋचा कुमारी बनाये गये हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
