Darbhanga News: जाले. भारत गांवों का देश है. बाढ़, सूखाड़, ओलावृष्टि आदि से जूझने वाले गांव के किसानों को कम ब्याज पर अटल बिहारी बाजपेयी ने क्रेडिट कार्ड देने का काम किया था. नरेंद मोदी की सरकार आयी तो किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें वैज्ञानिकों द्वारा समेकित कृषि प्रणाली व जलवायु अनुकूल खेती का प्रशिक्षण दिलाने का काम किया. प्रधानमंत्री का कहना है कि 2047 तक विकसित भारत व आत्मनिर्भर भारत बन जाएगा. ये बातें सोमवार को अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित किसान मेला के समापन समारोह में बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री प्रेम कुमार ने कही. उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य की सरकार किसानों के उत्थान के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है. सहकारिता के क्षेत्र में सिंहवाड़ा को एक गोदाम व एक कोल्ड-स्टोरेज दिया जा चुका है, अब जाले की बारी है. वहीं नगर विकास व आवास मंत्री जीवेश कुमार ने कहा कि कृषि विज्ञान द्वारा आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में वे अक्सर आते रहते हैं. डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्व विद्यालय पूसा के निदेशक प्रसार शिक्षा ने फसलों तथा उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने का आग्रह किसानों से किया. राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ बीआर जेना ने मखाना का उत्पादन तथा उसमें सिंघाड़ा का समावेश करने का किसानों से आग्रह किया. निदेशक बीज डॉ डीके राय ने किसानों को शुद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण बीज की प्राप्ति के लिए बीज निदेशालय में संपर्क स्थापित करने की बात कही. केवीके के अध्यक्ष डॉ दिव्यांशु शेखर, कृषि विज्ञान केंद्र पिपराकोठी के वरीय वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ अरविंद कुमार सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र तुर्की के अध्यक्ष डॉ मोती लाल मीणा, सुखेत के अध्यक्ष डॉ एसके गंगवार एवं पूसा विश्वविद्यालय के विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत खेती की जानकारी दी. .
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