जिन वाहनों के मिल सकते थे लाखों रुपये, लोहा-टीना के भाव तौलकर मिलेगी उनकी कीमत

जिले के थाना व ओपी में दो हजार से ज्यादा बड़ी-छोटी गाड़ियां जब्त कर रखी हुई हैं.

कुमार रौशन, दरभंगा. जिले के थाना व ओपी में दो हजार से ज्यादा बड़ी-छोटी गाड़ियां जब्त कर रखी हुई हैं. जब्त किये गये वाहनों में कई सड़-गल चुके हैं, वहीं कई वाहनों पर तो घास-फूंस उग आये हैं. कबाड़ बने ये वाहन थाना परिसर की स्वच्छता पर दाग बने हुए हैं. थाना परिसरों को कबाड़ खाना बना दिया गया है. समय रहते अगर इनकी नीलामी हो जाती तो सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व मिलता. अब तो स्थिति यह है कि अगर नीलामी की तो कबाड़ के भाव ही तौलकर ये वाहन बिकेंगे. जिन वाहनों के लाखों रुपये का राजस्व आ सकता था, उसके एवज में अब लोहे-टीन के भाव में तौल से कीमत मिलेगी. कई थाना का परिसर जब्ती के वाहनों से भर गया है. विश्वविद्यालय थाना परिसर में एक के ऊपर एक वाहन लादकर रखे गये हैं. इनके ऊपर पौधों की बेल चढ़ गयी हैं. कुछ यही हाल जिले के अन्य पुलिस थानों व ओपी का भी है. जानकारी के अनुसार पुलिस दो तरह से वाहन जब्ती की कार्रवाई करती है. इसमें वाहन को लावारिस मानकर 25 पुलिस एक्ट में जब्त करती है. इन्हें नीलाम करना आसान है. पुलिस अधिकारी चाहे तो प्रतिवेदन देकर एसडीएम के माध्यम से नीलामी करा सकते हैं. वहीं आपराधिक प्रकरण में जब्त वाहनों की नीलामी के लिए न्यायालय में आवेदन पत्र देना पड़ता है, जिन वाहनों का न्यायालय से निराकरण हो गया है और कोई लेने वाला क्लेम करने वाला नहीं आता है तो ऐसे वाहनों को राजसात करके नीलाम कराने की अनुमति ली जाती है. इसकी राशि न्यायालय में जमा हो जाती है. हालांकि विभाग इस प्रक्रिया को बड़ा कठिन मानता है, इसलिए वाहन वर्षों तक रखे रहते हैं. समय-समय पर वाहनों की नीलामी होगी तो इसका लाभ मिलेगा. कई लोगों का कहना है कि जब्त वाहनों की जब तक नीलामी नहीं हो तब तक रखने के लिए अलग व्यवस्था की जा सकती है. इसके लिए एक यार्ड बनाया जा सकता है, जहां जब्त किये गये वाहन रखे जा सकते हैं. वहां वाहनों का रखरखाव भी हो सकता है. हालांकि अभी तक इस दिशा में पुलिस विभाग की ओर से किसी तरह की पहल नहीं की गयी है. पुलिस सिर्फ जब्त वाहन को अपने थाना में रखकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेती है. इससे राजस्व का भी नुकसान होता है.

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By Prabhat Khabar News Desk

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