DMCH: लिफ्ट में घंटों फंसे रहे दो बच्चे सहित छह लोग, नहीं लगाया गया था अलार्म सिस्टम

DMCH: डीएमसीएच के न्यू सर्जिकल भवन के लिफ्ट में खराबी आने के कारण दो बच्चे सहित छह मरीज के परिजन लिफ्ट के अंदर फंस गए. काफी हंगामे के बाद लिफ्ट मैन के आने पर लिफ्ट का गेट खोला गया.

DMCH: उत्तर बिहार के सबसे बड़े अस्पताल डीएमसीएच के न्यू सर्जिकल भवन के लिफ्ट में खराबी आने के कारण दो बच्चे सहित छह मरीज के परिजन लिफ्ट के अंदर फंस गए. उन्हें निकालने के लिए डीएमसीएच प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी. यहां लगे लिफ्ट के अंदर जाते ही लोगों के मोबाइल का नेटवर्क गायब हो जाता है और इस लिफ्ट में अलार्म सिस्टम भी नहीं लगाया गया है. फंसे लोगों ने बाहर परिसर में खड़े लोगों को इशारा करके बुलाया तो लोग समझ पाए की लिफ्ट में खराबी के कारण गेट नहीं खुल रहा है.

लिफ्ट में जाते ही मोबाइल काम करना बंद कर देता

बताया जाता है सर्जिकल भवन में मरीज को लेकर परिजन दूसरे तल्ले पर जा रहे थे इस दौरान करीब छह लोग लिफ्ट अंदर ही फंस गए. नए सर्जिकल भवन का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिसम्बर 2023 में किया था. जनवरी 2024 से इस भवन में सर्जरी और ऑर्थो विभाग को चलाया जा रहा है. इस भवन में कुल तीन जगहों पर 9 लिफ्ट लगाए गए जिसमें मात्र 1 लिफ्ट ही चालू है. इसको चलाने के लिए लिफ्ट मैन को बहाल किया गया है.

इस लिफ्ट के अंदर जाते ही लोगों का मोबाइल काम करना बंद कर देता है. वहीं, इस लिफ्ट में अलार्म सिस्टम भी नहीं लगाया गया है. जिस कारण आज इसमें फंसे लोग किसी बाहरी व्यक्ति को फोन करके भी नहीं बुला सके. गनीमत रही की बाहर में खड़े अन्य मरीज के परिजनों को लगा कि लिफ्ट नहीं खुल रहा है तो उनलोगों ने अस्पताल प्रशासन को सूचना दिया तो लिफ्ट मैन भागा भागा आया तब जाकर लिफ्ट में फंसे लोगो को बाहर निकाला जा सका.

लिफ्ट में फंसे लोग क्या बोले

लिफ्ट में फंसे मरीज के परिजन विनोद राम ने बताया कि छह लोग लिफ्ट में खराबी आने के कारण फंसे हुए थे. लिफ्ट का गेट नहीं खुल रहा था. काफी हंगामे के बाद लिफ्ट मैन के आने पर लिफ्ट का गेट खोला गया तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली.

इसे भी पढ़ें: BPSC Paper Leak की खबरों के बीच अध्यक्ष का बड़ा बयान

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >