अलीनगर में धान की रोपनी ने पकड़ी रफ्तार, मजदूर और बिचड़े की कमी बनी चुनौती

अलीनगर में झमाझम बारिश के बाद धान की रोपनी में तेजी आई है। हालांकि, मजदूरों की कमी और बिचरे की किल्लत से किसान अब भी जूझ रहे हैं। जानें पूरी खबर।

Darbhanga News: प्रखंड क्षेत्र में हुई बारिश के बाद धान की रोपनी ने रफ्तार पकड़ ली है. निचले इलाकों के खेतों में पानी भरने से किसानों को राहत मिली है और रोपनी का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. हालांकि तैयार बिचड़े की कमी और मजदूरों का अभाव अब भी किसानों के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है.

बारिश से पहले पंपसेट के सहारे शुरू हुई थी रोपनी

वर्षा नहीं होने के बावजूद कई किसानों ने पंपसेट और अन्य सिंचाई साधनों की मदद से धान का बिचड़ा तैयार कर लिया था. इसी के सहारे कुछ खेतों में रोपनी भी शुरू कर दी गई थी. अनुमान है कि बारिश से पहले सिंचाई योग्य करीब 20 प्रतिशत भूमि में धान की रोपनी हो चुकी थी. अब अच्छी बारिश के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 50 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया है.

ऊंची जमीन पर अब भी सिंचाई का सहारा

निचले इलाकों में खेतों में पर्याप्त पानी जमा होने से रोपनी आसान हो गई है, लेकिन ऊंची भूमि वाले किसानों को अब भी पंपसेट के जरिए सिंचाई करनी पड़ रही है. कई किसानों के पास पर्याप्त बिचड़ा उपलब्ध नहीं है, जबकि कई मजदूरों की कमी से समय पर रोपनी नहीं कर पा रहे हैं.

मजदूरों की कमी से महिलाएं संभाल रहीं जिम्मेदारी

धान रोपनी के मौसम में बड़ी संख्या में स्थानीय मजदूर पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में काम करने चले जाते हैं. इसका असर खेती पर साफ दिखाई दे रहा है. मजदूरों की कमी को पूरा करने के लिए गांवों में बड़ी संख्या में महिलाएं खेतों में बिचड़ा उखाड़ने और धान की रोपनी करती नजर आ रही हैं.

6839 हेक्टेयर में धान रोपनी का लक्ष्य

कृषि विभाग ने इस वर्ष प्रखंड क्षेत्र में 6839 हेक्टेयर भूमि में धान की रोपनी का लक्ष्य निर्धारित किया है. हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में लक्ष्य कुछ कम रखा गया है, क्योंकि इस बार किसानों ने मखाना की खेती में भी विशेष रुचि दिखाई है.

प्रखंड कृषि पदाधिकारी रामकुमार मंडल ने बताया कि किसान लक्ष्य पूरा करने के लिए पूरी सक्रियता से काम कर रहे हैं. यदि एक-दो अच्छी बारिश और हो जाए तो धान रोपनी का कार्य तेजी से पूरा होने की उम्मीद है.


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Author: M.d. aizuddin sarim

Published by: Sarfaraz Ahmad

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