कुशेश्वरस्थान चचरी पुल: विकास के दावों के बीच कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड का रहिपुरा गांव आज भी एक पक्के पुल का इंतजार कर रहा है. कमला नदी पर करीब 250 मीटर लंबा बांस का चचरी पुल पिछले कई वर्षों से 12 गांवों के लोगों की लाइफलाइन बना हुआ है. बाढ़ आने पर यह पुल हर साल बह जाता है और पानी उतरने के बाद ग्रामीण फिर से चंदा जुटाकर नया पुल तैयार करते हैं. यही वजह है कि इलाके के लोग आज भी सरकारी पुल बनने की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
12 गांवों के लिए यही है सबसे अहम रास्ता
रहिपुरा गांव का यह अस्थायी पुल केवल एक गांव की जरूरत नहीं, बल्कि आसपास के करीब 12 गांवों की जीवनरेखा है. इसी पुल के सहारे गढ़पुरा, पिपराही, घरदौड़, झाझरा, नारायणपुर, चिगरी, सिमराहा के अलावा समस्तीपुर जिले के हसनपुर, शनिचरा और खगड़िया जिले की ओर आने-जाने वाले हजारों लोगों का आवागमन होता है. स्कूल, अस्पताल, बाजार, कोर्ट-कचहरी और अन्य जरूरी कामों के लिए लोगों के पास यही एक प्रमुख रास्ता है.
नाव हादसों के बाद बना चचरी पुल
भाजपा के पूर्व प्रखंड महामंत्री संतोष यादव बताते हैं कि पहले लोग नाव से नदी पार करते थे. कई हादसों के बाद ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर करीब एक लाख रुपये की लागत से बांस का चचरी पुल बनाया. तब से हर साल बाढ़ के बाद इसी परंपरा को दोहराया जा रहा है.
हर साल बह जाता है पुल
ग्रामीण अरविंद सहनी, बृजनंदन सहनी, इंद्रदेव सहनी, डॉ. हीरा सहनी, डॉ. श्यामसुंदर सिंह, रामकुमार मुखिया, कन्हैया कुमार साह, श्याम सहनी और अनिल कुमार यादव बताते हैं कि बाढ़ आते ही चचरी पुल बह जाता है. पानी घटने के बाद गांव के लोग फिर से चंदा इकट्ठा करते हैं और बांस खरीदकर नया पुल बनाते हैं. वर्षों से यही सिलसिला चलता आ रहा है.
पक्के पुल की मांग, कब मिलेगी राहत?
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गांव-गांव सड़क और पुल निर्माण के दावे करती है, लेकिन रहिपुरा और आसपास के इलाकों में आज तक स्थायी पुल नहीं बन पाया. लोगों का कहना है कि यदि कमला नदी पर पक्का पुल बन जाए तो हजारों लोगों की रोजमर्रा की परेशानी खत्म हो जाएगी और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा रोजगार तक पहुंच भी आसान हो जाएगी.
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