Darbhanga News: सदर. राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र में बिहार कृषि प्रबंधन व प्रसार प्रशिक्षण संस्थान (बामेती) पटना के तत्वावधान में प्रशिक्षण का आयोजन शनिवार को किया गया. इसमें दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, सुपौल, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया व सहरसा जिलों के उद्यान पदाधिकारी, तकनीकी प्रबंधक, किसानों व उद्यमियों ने हिस्सा लिया. इसमें वैज्ञानिक डॉ वीके पडाला ने मखाना और सिंघाड़ा की खेती में एकीकृत पौध संरक्षण तकनीकी की जानकारी दी. कहा कि समेकित तकनीकों को अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता प्राप्त कर सकते हैं. वहीं प्रधान वैज्ञानिक डॉ आइएस सिंह ने बताया कि मखाना की खेती न केवल पारंपरिक खेती का विकल्प है, बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम भी बन रहा है. डॉ बीआर जना ने कहा कि रसायन रहित खेती से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा भी संभव है. आरके. राउत ने कहा कि आधुनिक मशीनों के प्रयोग से श्रम की बचत के साथ उत्पाद की गुणवत्ता और बाजार मूल्य भी बढ़ता है. वैज्ञानिक डॉ मनोज कुमार ने मखाना की उत्पादकता, गुणवत्ता एवं किसानों की आय में पोषक तत्व प्रबंधन की भूमिका को विस्तार से समझाया. प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों के बीच प्रमाण पत्र का वितरण किया गया. संचालन तकनीकी अधिकारी अशोक कुमार ने किया.
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