Darbhanga News: दरभंगा के कुशेश्वरस्थान में इस बार मक्के की लहलहाती फसल देखकर किसानों ने बड़े-बड़े सपने संजो लिए थे, लेकिन बुधवार शाम आई तेज आंधी और बारिश ने सब कुछ बर्बाद कर दिया. देखते ही देखते खेतों में खड़ी फसल जमीन पर गिर गई और किसानों के अरमान भी उसी के साथ टूट गए.
इस बाढ़ प्रभावित इलाके में किसान सालभर में मुख्य रूप से रबी फसल पर ही निर्भर रहते हैं. गेहूं और मक्का ही उनकी आमदनी का सहारा होता है. इस बार करीब 2500 हेक्टेयर में मक्के और 1200 हेक्टेयर में गेहूं की खेती हुई थी, लेकिन आंधी-पानी से 40 प्रतिशत से ज्यादा फसल बर्बाद हो गई है.
किसानों के सपने फसल पर टिके
किसानों का कहना है कि इस बार मक्के की पैदावार पिछले सालों से बेहतर होने वाली थी. कई किसानों ने बच्चों की पढ़ाई, शादी और घर की जरूरतों के सपने इसी फसल पर टिका रखे थे. लेकिन मौसम की मार ने एक झटके में सब खत्म कर दिया.
बंटाई पर खेती करने वाले किसानों की मुश्किलें
सबसे ज्यादा मुश्किल छोटे किसानों और बंटाई पर खेती करने वालों की है, जिन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी. अब उन्हें कर्ज चुकाने के साथ परिवार का पेट पालने की चिंता सता रही है. प्रखंड के कई गांवों के किसान खेतों में गिरी फसल को देखकर मायूस हैं. जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से फसल नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है. वहीं प्रशासन ने भी सर्वे कर नुकसान का आकलन करने की बात कही है.
दरभंगा से सुधीर कुमार चौधरी की रिपोर्ट
