दरभंगा के कुशेश्वरस्थान से संतोष पोद्दार की रिपोर्ट
Darbhanga News: दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड में शनिवार को वट सावित्री व्रत पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया. ज्येष्ठ अमावस्या और शनि जयंती के विशेष संयोग ने इस पर्व की धार्मिक महत्ता को और बढ़ा दिया. सुबह से ही गांवों, मंदिर परिसरों और वट वृक्षों के पास सुहागिन महिलाओं की भीड़ जुटी रही. महिलाओं ने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ पूजा-अर्चना की.
सुबह से पूजा स्थलों पर दिखी रौनक
प्रखंड क्षेत्र के चौक-चौराहों, शिवालयों और ग्रामीण इलाकों में स्थित बरगद के पेड़ों के नीचे सुबह से ही भक्तिमय माहौल बना रहा. नवविवाहिताओं से लेकर बुजुर्ग महिलाओं तक ने सोलह श्रृंगार कर पूजा में हिस्सा लिया. पूजा स्थलों पर पारंपरिक गीत और सत्यवान-सावित्री के जयकारों से माहौल गूंजता रहा.
वट वृक्ष की परिक्रमा कर मांगी पति की लंबी उम्र
व्रती महिलाओं ने सबसे पहले वट वृक्ष की जड़ में गंगाजल और दूध अर्पित किया. इसके बाद चंदन, फूल, धूप-दीप और नैवेद्य चढ़ाकर विधि-विधान से पूजा की. महिलाओं ने बरगद के पेड़ में कच्चा सूत लपेटते हुए सात और कई महिलाओं ने 108 बार परिक्रमा की. पूजा के दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुखद दांपत्य जीवन की कामना की.
कथा श्रवण और परंपराओं का किया निर्वहन
पर्व के दौरान महिलाओं ने बांस के बने पारंपरिक पंखे से वट वृक्ष और अपने पति को हवा करने की परंपरा निभाई. इसके बाद सामूहिक रूप से सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी गई. कथावाचकों ने बताया कि किस तरह माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और पतिव्रता धर्म से यमराज से अपने पति के प्राण वापस लिए थे.
फल और पारंपरिक पकवानों का लगा भोग
पूजा की थाली में आम, लीची, केला, भीगे चने और घर में बने पुआ-पूरी जैसे पारंपरिक व्यंजन शामिल रहे. पूजा समाप्त होने के बाद महिलाओं ने सुहाग की सामग्री और बायना बुजुर्ग महिलाओं को देकर आशीर्वाद लिया. इसके बाद फल और चने खाकर व्रत का पारण किया गया.
