Darbhanga News: नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या तीन निवासी मिथलेश मंडल के पुत्र सुधीर कुमार की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में उपचार के दौरान मौत हो गई. घटना के बाद मृतक के परिजनों में कोहराम मच गया है. परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर समय से जीवन रक्षक दवा (इंजेक्शन) उपलब्ध नहीं कराने का गंभीर आरोप लगाया है.
अचानक पड़ा मिर्गी का दौरा
परिजनों के अनुसार, सोमवार को सुधीर कुमार घर पर ही था कि तभी उसे अचानक मिर्गी का तेज दौरा पड़ा, जिससे वह देखते ही बेहोश हो गया. किशोर की हालत बिगड़ती देख आनन-फानन में घरवाले उसे इलाज के लिए तुरंत स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर आए, जहां ऑन-ड्यूटी चिकित्सकों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए आपातकालीन उपचार शुरू किया.
अस्पताल और बाजार दोनों जगह नहीं मिला जीवन रक्षक इंजेक्शन
अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए तैनात चिकित्सक ने उसे तुरंत ‘सोडियम वैल्प्रोएट’ (Sodium Valproate) इंजेक्शन लगाने की अत्यंत आवश्यकता बताई. सच्चाई यह रही कि सरकारी अस्पताल के दवा स्टोर में यह जीवन रक्षक इंजेक्शन उपलब्ध नहीं था. चिकित्सकों ने परिजनों को बिना वक्त गंवाए बाहर की दुकानों से इसे खरीदकर लाने को कहा. बेबस परिजन दवा के लिए जाले बाजार की कई दुकानों पर भटके, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी बाजार में भी वह इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हो सका. इसी अभाव के बीच किशोर ने अस्पताल के बेड पर ही दम तोड़ दिया.
पुलिस ने आकर संभाला मोर्चा
किशोर की मौत की खबर मिलते ही रोते-बिलखते परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा. लापरवाही और अस्पताल में दवा न होने का आरोप लगाते हुए लोगों ने जमकर हंगामा किया, जिससे काफी देर तक अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा. घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और आक्रोशित परिजनों को समझा-बुझाकर स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित किया.
अस्पताल प्रभारी डॉ. विवेकानंद झा का बयान
पूरे मामले पर जाले सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विवेकानंद झा ने बताया कि मृत किशोर पहले से भी मिर्गी की बीमारी से पीड़ित था. उन्होंने अस्पताल की कमी को स्वीकार करते हुए सीधे तौर पर कहा कि अस्पताल के सरकारी कोटे में मिर्गी के लिए सोडियम वैल्प्रोएट मिक्सचर (सिरप/दवा) तो उपलब्ध है, लेकिन मुख्यालय स्तर से इस साल्ट का इंजेक्शन विभाग को उपलब्ध नहीं कराया गया है.
अस्पताल प्रभारी ने माना कि यदि अस्पताल में वह जीवन रक्षक इंजेक्शन उपलब्ध होता, तो समय पर मरीज को देकर उसकी जान बचाने की संभावना काफी हद तक बढ़ सकती थी. उन्होंने तंत्र पर सवाल उठाते हुए यह भी बड़ा खुलासा किया कि अस्पताल का नया भवन निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद इस स्वास्थ्य संस्थान को विभाग द्वारा अब तक ‘पूर्ण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र’ का क्रियाशील दर्जा नहीं मिल सका है.
दरभंगा से केशवेन्द्र प्रताप ठाकुर की रिपोर्ट
