Darbhanga News: प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में चल रही सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. नियम के विरुद्ध अधिकांश कार्य स्थलों पर सूचना बोर्ड नहीं लगाए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण यह नहीं जान पा रहे कि कौन सा काम किस मद से और कितनी लागत से हो रहा है. यह स्थिति मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना और 15वीं वित्त आयोग जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में भी बनी हुई है.
9 महीने बाद भी सुपौल पंचायत में नहीं लगा बोर्ड
स्थानीय समाजसेवी डॉ. शशि भूषण महतो ने बताया कि सुपौल पंचायत में सतो पोद्दार के घर से सतो महतो के घर तक पीसीसी सड़क का निर्माण 9 महीने पहले ही पूरा हो चुका है. लेकिन आज तक वहां योजना से संबंधित कोई बोर्ड नहीं लगाया गया. यही हाल अन्य पंचायतों का भी है, जहां बोर्ड नदारद हैं या फिर उन्हें किसी निजी दीवार पर टांग कर खानापूर्ति की जा रही है.
प्रशासन की नाक के नीचे नियमों की अनदेखी
हैरानी की बात यह है कि थाना से सटे और पुराने प्रखंड कार्यालय के पास एनएच-56 के किनारे चाहरदीवारी का निर्माण किया जा रहा है. प्रशासनिक अधिकारियों की नाक के नीचे हो रहे इस कार्य का भी कोई ब्यौरा सार्वजनिक नहीं है. राजद नेता कैलाश चौधरी का आरोप है कि सूचना बोर्ड नहीं लगाने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है और घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग की गुंजाइश बढ़ जाती है.
बीपीआरओ बोले- हमें जानकारी नहीं
जब इस अव्यवस्था के बारे में प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी (BPRO) सुनील कुमार से पूछा गया, तो उन्होंने मामले की जिम्मेदारी लेने के बजाय उल्टा सवाल दाग दिया कि “योजना की जानकारी आप ही दीजिए, हमें मालूम नहीं है.” अधिकारियों का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया पंचायत स्तर पर चल रही योजनाओं की मॉनिटरिंग पर बड़े सवाल खड़े करता है. ग्रामीणों ने मांग की है कि सभी योजनाओं के स्थल पर कार्य एजेंसी और राशि का विवरण अंकित बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाया जाए.
दरभंगा के बिरौल से शंकर सहनी की रिपोर्ट
