Darbhanga News: राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र में मध्य प्रदेश के उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के दो दर्जन कृषकों एवं अधिकारियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण सह परिभ्रमण शुक्रवार को संपन्न हो गया. प्रशिक्षण के दौरान किसानों को मखाना उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक, आधुनिक प्रबंधन, यांत्रिकीकरण, जल प्रबंधन, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन की जानकारी दी गयी.
अनुकूल क्षेत्रों में मखाना उत्पादन बढ़ाने पर जोर
केंद्र प्रभारी डॉ. आइएस सिंह ने कहा कि मखाना बिहार के साथ देश की महत्वपूर्ण जलीय फसल के रूप में तेजी से उभर रहा है. वैज्ञानिक तकनीक और आधुनिक प्रबंधन अपनाकर अनुकूल क्षेत्रों में इसका उत्पादन बढ़ाया जा सकता है.
वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार ने प्राकृतिक जलभराव अथवा पर्याप्त सतही जल वाले क्षेत्रों में ही मखाना विस्तार पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि नर्मदापुरम, पन्ना, रायसेन, सिवनी, छिंदवाड़ा और बालाघाट में अच्छी वर्षा एवं पर्याप्त जल संसाधन के कारण मखाना उत्पादन की व्यापक संभावना है.
उन्होंने भूमिगत जल पर निर्भरता को जोखिमपूर्ण बताया.
यांत्रिकीकरण से श्रम लागत कम करने की जानकारी
वैज्ञानिक डॉ. धर्मेंद्र ने यांत्रिकीकरण के माध्यम से श्रम लागत कम करने और मखाना उत्पादन का विस्तार करने की जानकारी दी.
वैज्ञानिक एसएम राउत ने मखाना के साथ मछली उत्पादन, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन की जानकारी दी. वहीं एसबी तराटे ने भूमि एवं जल प्रबंधन की तकनीक के बारे में बताया.
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