Jhulelal Mahotsav 2026: पूज्य सिंधी पंचायत, दरभंगा के तत्वावधान में शुक्रवार को पांच दिवसीय श्री झूलेलाल महोत्सव का श्रद्धा एवं उल्लास के साथ शुभारंभ हुआ. महोत्सव के प्रथम दिन अहले सुबह बड़ी संख्या में सिंधी समाज के श्रद्धालु कटहलबाड़ी भंडार चौक स्थित पूज्य श्री झूलेलाल मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना के बाद प्रभात फेरी निकाली.
प्रभात फेरी में महिला, पुरुष एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. श्रद्धालु भगवान झूलेलाल के जयकारे लगाते हुए भक्ति गीतों के साथ शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरे. भंडार चौक एवं विभिन्न सिंधी मोहल्लों से होते हुए प्रभात फेरी पुनः झूलेलाल मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई.
सिंधी समाज के आराध्य देव हैं भगवान झूलेलाल
पूज्य सिंधी पंचायत के मुखिया जगत लाल जुमनानी ने बताया कि भगवान झूलेलाल सिंधी समाज के आराध्य देव हैं. उन्हें वरुण देव का स्वरूप माना जाता है. वे जल, जीवन, समृद्धि, प्रेम एवं सामाजिक एकता के प्रतीक हैं.
उन्होंने बताया कि सिंधी समाज में झूलेलाल की आराधना धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है.
22 अगस्त को होगा प्रसाद वितरण
जगत लाल जुमनानी ने बताया कि 22 अगस्त को कटहलबाड़ी भंडार चौक स्थित श्रीराम मंदिर में दोपहर 12 बजे से प्रभु इच्छा तक श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में चावल एवं काबुली चना का वितरण किया जाएगा.
उन्होंने बताया कि 23, 24 एवं 25 अगस्त को प्रातः 10 बजे और संध्या छह बजे श्री झूलेलाल जी की विशेष आरती होगी. 23 अगस्त की शाम सात बजे से झूलेलाल मंदिर में बाल कलाकारों द्वारा भजन संध्या आयोजित की जाएगी.
24 अगस्त की शाम ग्वालियर से आये सिंधी म्यूजिकल ग्रुप के कलाकार सिंधी एवं हिंदी भाषा में भजन और भक्ति गीत प्रस्तुत करेंगे. 23 एवं 24 अगस्त की रात आम श्रद्धालुओं के लिए भंडारा एवं प्रसाद की व्यवस्था की गयी है.
25 अगस्त को निकलेगी बहराणा साहिब की शोभायात्रा
महोत्सव के अंतिम दिन 25 अगस्त की शाम चार बजे झूलेलाल मंदिर से बहराणा साहिब की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी. शोभायात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए संपन्न होगी.
बहराणा साहिब सिंधी समाज की धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व रखता है. इसमें भगवान झूलेलाल के प्रति श्रद्धा एवं आस्था के प्रतीक स्वरूप ज्योति, कलश एवं अन्य पूजन सामग्री शामिल होती है. सिंधी समाज के लोग बहराणा साहिब को श्रद्धापूर्वक सजाकर शोभायात्रा निकालते हैं.
इस दौरान सामूहिक रूप से भगवान झूलेलाल की आराधना कर सुख-शांति, समृद्धि एवं समाज के कल्याण की कामना की जाती है. महोत्सव को लेकर सिंधी समाज के लोगों में विशेष उत्साह है.
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