Darbhanga News: दरभंगा व्यवहार न्यायालय परिसर से गिरफ्तार फर्जी मल्टी टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी जुनैद आलम की अदालत ने दोनों आरोपितों को मंडल कारागार भेजने का आदेश दिया है. वहीं, मामले में हिरासत में लिए गए अपर लोक अभियोजक (एपीपी) अशोक कुमार को अदालत ने एक सप्ताह के लिए औपबंधिक रूप से छोड़ने का आदेश दिया है.
दो आरोपितों को भेजा गया जेल
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान बहेड़ी थाना क्षेत्र के तूर्की निवासी विकास कुमार यादव और सदर थाना क्षेत्र के तेलहन लक्ष्मीपुर निवासी मनोज कुमार यादव के रूप में हुई है. इस संबंध में लहेरियासराय थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है.
फर्जी पहचान पत्र के सहारे ले रहे थे प्रशिक्षण
पुलिस के अनुसार, दोनों युवक कथित फर्जी पहचान पत्र के आधार पर खुद को मल्टी टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) बताकर लंबे समय से व्यवहार न्यायालय में प्रशिक्षण ले रहे थे. मामले की जानकारी मिलने पर लहेरियासराय थाना पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया.
पुलिस ने प्रशिक्षण देने वाले अपर लोक अभियोजक अशोक कुमार को भी हिरासत में लिया था. जांच के बाद तीनों को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में प्रस्तुत किया गया.
फर्जी आई-कार्ड और दस्तावेज बरामद
पुलिस के अनुसार, दोनों युवकों के पास से सिविल कोर्ट, दरभंगा के नाम से जारी कथित पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं. प्रारंभिक जांच में आई-कार्ड पर अंकित जारीकर्ता का पद, मुहर और हस्ताक्षर संदिग्ध पाए गए हैं.
संगठित गिरोह की आशंका
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि नौकरी दिलाने के नाम पर सक्रिय कोई संगठित गिरोह इस पूरे मामले के पीछे हो सकता है. पुलिस ने अपर लोक अभियोजक, दोनों युवकों और फर्जी पहचान पत्र तैयार करने वाले अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.
पुलिस के अनुसार, दोनों युवकों ने पूछताछ में बताया कि वे 23 जून 2024 से व्यवहार न्यायालय के विभिन्न कोर्ट में एमटीएस के रूप में प्रशिक्षण ले रहे थे.
