Darbhanga News: स्कूलों में अब सफाई कर्मी को करना होगा कक्षाओं की भी सफाई

Darbhanga News:वर्तमान में आउटसोर्सिंग से स्कूलों में टॉयलेट की सफाई की जा रही है.

Darbhanga News: दरभंगा. वर्तमान में आउटसोर्सिंग से स्कूलों में टॉयलेट की सफाई की जा रही है. अब एजेंसी के माध्यम से विद्यालयों में शौचालय के साथ-साथ संपूर्ण परिसर की साफ- सफाई करायी जायेगी. सभी कक्षा के साथ ही बैंच- डेस्क, सभी उपकरण की सफाई होगी. फर्श का झाड़ू के साथ पोछा लगाया जायेगा. गटर की सफाई, शौचालय की पूर्ण सफाई, बाहरी क्षेत्र की सफाई एवं वेजिटेशन, डस्टबिन डिस्पोजल, सभी दीवार, दरवाजा, बरामदा आदि की सफाई नियमित रूप से होगी. इस आशय का पत्र शिक्षा विभाग के उप सचिव ने जारी किया है. डीइओ से कहा है कि किसी भी हाउसकीपिंग एजेंसी से एक साल के लिये अनुबंध इस शर्त के साथ करें कि उसके द्वारा विभाग से समय-समय पर मिलने वाले दिशा- निर्देश का पालन करना होगा.

सफाई के दौरान प्रभावित नहीं होगा स्कूल का कामकाज

हाउसकीपिंग एजेंसी अपने सफाई कर्मियों को इस प्रकार प्रशिक्षित करेंगे की सफाई के दौरान विद्यालय के निर्धारित कामकाज प्रभावित नहीं हो. सफाई सामग्री नियमित रूप से प्रधानाध्यापक से रिसीव करेंगे. स्पष्ट किया है कि प्राथमिक विद्यालय के लिए न्यूनतम दो यूनिट, मध्य विद्यालय के लिए न्यूनतम तीन यूनिट, प्रारंभिक विद्यालय के लिए न्यूनतम छह यूनिट तथा माध्यमिक एवं उत्तर माध्यमिक विद्यालयों के लिए न्यूनतम आठ यूनिट की दर से पारिश्रमिक तय की जाएगी. प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों के लिए 50 रुपये प्रति सीट, माध्यमिक विद्यालयों के लिए 100 रुपये प्रति यूनिट के दर से भुगतान किया जा सकेगा. विभाग का कहना है कि प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में वर्ग कक्ष ज्यादा नहीं होते हैं, इसीलिए उनके लिए माध्यमिक विद्यालय से प्रति सीट की दर कम निर्धारित की गई है.

प्रारंभिक विद्यालयों में हमेशा रहा है सफाई का टोटा

माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में छात्र कोष के उपयोग से विद्यालय की प्रत्येक दिन सफाई कराई जाती रही है, किंतु प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में हमेशा से सफाई का टोटा रहा है. साल भर में मिलने वाली विकास राशि से ही इस कार्य को करने का निर्देश प्राप्त होता रहा है. सफाई कर्मी पैसे के लिये साल भर में इंतजार करने को तैयार नहीं होते. इस कारण इन विद्यालयों में वर्ग कक्ष की सफाई प्राय रोस्टर के अनुसार छात्र-छात्राएं करते रहे हैं या फिर एमडीएम रसोइया से सफाई कराया जाता रहा है. दोनों स्थितियां सही नहीं मानी जाती. टॉयलेट की सफाई सप्ताह- महीने में एक- दो बार हो जाए, तो बहुत बड़ी बात मानी जाती थी. गत वर्ष से टॉयलेट की सफाई नियमित रूप से होने के कारण छात्राओं की उपस्थिति बढ़ी है.

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Author: PRABHAT KUMAR

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