Darbhanga News: दरभंगा. भारत में “यत्र नार्यस्तु पुजयन्ते, रमन्ते तत्र देवता “की परंपरा रही है, परन्तु आजकल हम नारी को पूरा सम्मान नहीं दे पा रहे हैं. हम सभी संकल्प लें, कि समाज को शिक्षित और जागरूक बनाना है. बाल विवाह जैसी कुरीति को मिटाना है. यह बातें दरभंगा न्याय मण्डल के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष शिव गोपाल मिश्रा ने न्यायालय परिसर स्थित मध्यस्थता भवन में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वाधान में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (नालसा) द्वारा प्रायोजित आशा योजना और बाल विवाह पर रोकथाम के लिए हुई कार्यशाला में कही. इससे पूर्व उदघाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिव गोपाल मिश्रा, परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश प्रमोद कुमार पंकज, डीएम कौशल कुमार, एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी, प्राधिकार की सचिव आरती कुमारी ने दीप प्रज्जवलित कर किया. प्रधान जिला जज ने कहा कि एक बच्चा जो स्वयं शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व नहीं है, वह अपने बच्चों का परिवरिश कैसे कर सकता है. बच्चे समाज और राष्ट्र का भविष्य हैं, जिन्हें सुशिक्षित करना आवश्यक है. जब हम मानसिक रूप से सशक्त होंगे, तब ही जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकते हैं. सशक्त माता पिता ही बच्चों को सक्षम बना सकते हैं. कहा कि बाल विवाह सामाजिक अभिशाप है.
जनजागरूकता और कानून से मिटेगा बाल विवाह- डीएम
डीएम कौशल कुमार ने कहा कि सामाजिक जनजागरूकता और कानून की सहायता से हमें बाल विवाह जैसी कुरीति को मिटाना है. एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी, परिवार अदालत के प्रधान न्यायाधीश प्रमोद कुमार पंकज, सचिव आरती कुमारी ने भी विचार रखा. संचालन न्यायिक पदाधिकारी आनंद सौरभ ने किया. मौके पर जिला शिक्षा पदाधिकारी, डीपीओ, अधिवक्ता आदि मौजूद थे.
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