दरभंगा: शोध और उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (लनिमिवि) में शोधार्थियों और शिक्षकों को AI की आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की पहल की गयी है. विश्वविद्यालय के रसायन विभाग की ओर से रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल के सहयोग से पांच दिवसीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला “रिसर्च विथ AI: फ्राम आइडियाज टू इनोवेशन” का आयोजन 14 से 18 सितंबर तक किया जाएगा.
सोमवार को कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने कार्यशाला के ब्रोशर का विमोचन किया. मौके पर विज्ञान संकाय के डीन सह रसायन विभागाध्यक्ष प्रो. दिलीप कुमार चौधरी, डॉ अनिन्द्र शर्मा, डॉ अभिषेक राय और डॉ मोनी शर्मा मौजूद थे.
ChatGPT से Perplexity तक AI टूल्स का मिलेगा प्रशिक्षण
कुलपति ने कहा कि वर्तमान दौर में AI शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से अपनी जगह बना रहा है. ऐसे में शिक्षकों और शोधार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना समय की जरूरत है.
कार्यशाला में प्रतिभागियों को विभिन्न Generative AI टूल्स के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी जाएगी. इनमें ChatGPT, Gemini, Claude, Copilot और Perplexity जैसे उपकरण शामिल हैं.
Prompt Writing से अकादमिक लेखन तक सीखेंगे तकनीक
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को प्रभावी Prompt Writing, Lesson Plan तैयार करने और अकादमिक सामग्री विकसित करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसके अलावा AI की सहायता से अकादमिक लेखन और शोध परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के तरीकों की भी जानकारी दी जाएगी.
कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में Generative AI के जिम्मेदार एवं प्रभावी इस्तेमाल के लिए प्रतिभागियों को आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करना है.
आधुनिक तकनीक और पारंपरिक शोध पद्धति को जोड़ने का अवसर
कार्यशाला में विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ अपने अनुभव और तकनीकी जानकारी साझा करेंगे. शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए यह कार्यशाला पारंपरिक शोध पद्धतियों के साथ आधुनिक डिजिटल तकनीकों को जोड़ने का अवसर उपलब्ध कराएगी.
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