Darbhanga News: दरभंगा. लनामिवि के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग में शोधार्थी मलय नीरव के कविता संग्रह ‘शब्दों की रोटियां’ का लोकार्पण समारोह विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को हुआ. प्रो. कुमार ने कहा कि यह किताब मलय नीरव के गंभीर अध्यवसाय का सुफल है. संग्रह की ‘शब्दों की रोटियां’ कविता ध्यानाकर्षित करती है. कहा कि कविताएं वर्तमान स्मृतिहीनता के दौर में स्मृति के पक्ष में एक मुकम्मल बयान है. जिस प्रकार हमारी स्मृति पर सुनियोजित हमले जारी हैं, ऐसे में जीवन के छोटे-छोटे किंतु मर्मस्पर्शी लम्हों की रक्षा का प्रयोजन कविता के रूप में सामने आया है.
युवा पीढ़ी में लिखने-पढ़ने की आदत छूटती जा रही
संकायाध्यक्ष प्रो. मंजू राय ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी में लिखने-पढ़ने की आदत छूटती जा रही है. इस दौर में मलय नीरव का यह संग्रह गहरी आश्वस्ति प्रकट करता है. संग्रह में कवि ने किसानों की स्थिति पर गंभीरतापूर्वक विचार किया है. जिस प्रकार पर्यावरण, संस्कृति आदि की क्षति हो रही है, उस पर लिखा है. प्रो. मुनेश्वर यादव ने कवि ने इस संग्रह में कई विषयों को स्पर्श किया है, जिससे उनके चिंतन के विस्तृत आयाम का पता चलता है. कविताएं सत्ता प्रायोजित चिंतन की संरचना को अपदस्थ कर मौलिक दृष्टि से देखने-समझने की शक्ति देती है. डॉ सुरेन्द्र प्रसाद सुमन ने संग्रह की कविताओं को प्रभावशाली बताया. डॉ महेश प्रसाद सिन्हा ने कहा कि कवि ने सूक्ष्मता से शब्दों की कारीगरी प्रस्तुत की है.
रोटियों की जरूरत हमेशा बनी रहेगी
कवि मलय नीरव ने बताया कि रोटियों की जरूरत हमेशा बनी रहेगी. ठीक इसी प्रकार शब्दों की जरूरत भी हमेशा बनी रहेगी. कविता शब्द और भाव के बीच की आवाजाही है. यह दोतरफा रास्ता है. संग्रह में इस यात्रा को पूरी ईमानदारी से तय करने की कोशिश की है. मलय नीरव ने संग्रह की कुछ चुनिंदा कविताओं का पाठ किया. कार्यक्रम का संचालन रोहित कुमार पटेल तथा धन्यवाद ज्ञापन कंचन रजक ने किया. मौके पर दुर्गानंद ठाकुर, समीर, सरिता, पुष्पा कुमारी, विद्यासागर, मिल्टन, संध्या राय, जयप्रकाश, बबीता, बेबी, रूबी, अंशु, अपर्णा, शिवानी, ज्योति सिन्हा, अमित, नबी हुसैन, दीपक कुमार, धीरज, लक्ष्मण, हरेकांत यादव, सूरज नारायण आदि मौजूद थे.
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