बाजार पर नहीं चढ़ा होली का रंग

बेअसर. कपड़े का कारोबार फीका, सूना-सूना नजर आ रहा मार्केट दरभंगा : होली का त्यौहार निकट आ गया है. रंगों के इस पर्व में महज तीन दिन ही शेष रह गये हैं, बावजूद बाजार में कोई खास हलचल नजर नहीं आ रही है. कपड़ा बाजार शांत पड़ा है. सामान्य दिन की ही तरह कारोबार चल […]

बेअसर. कपड़े का कारोबार फीका, सूना-सूना नजर आ रहा मार्केट

दरभंगा : होली का त्यौहार निकट आ गया है. रंगों के इस पर्व में महज तीन दिन ही शेष रह गये हैं, बावजूद बाजार में कोई खास हलचल नजर नहीं आ रही है. कपड़ा बाजार शांत पड़ा है. सामान्य दिन की ही तरह कारोबार चल रहा है. लिहाजा कारोबारी मायूस नजर आ रहे हैं. पहले जहां दुकान में पांव रखने तक की जगह नहीं मिलती थी, वहीं इन दिनों दुकान सूना-सूना सा नजर आ रहा है. देर रात तक ग्राहकों से गुलजार रहनेवाला बाजार शाम ढलते ही खामोशी की चादर ओढ़ लेता है. इसे लोग नोटबंदी से भी जोड़कर देख रहे हैं. वहीं महंगाई का भी असर माना जा रहा है.
नये कपड़े की परंपरा पड़ी कमजोर: मिथिला में ऐसा दो अवसर आता है, जिसमें नये कपड़े लेने की परंपरा सी है. प्राय: सभी लोग अपनी क्षमता के अनुसार कपड़े की खरीदारी करते हैं. इसमें एक मौका होली का पर्व लेकर आता है. वैसे इस पर्व पर पुरूष वर्ग के लिए खासकर कुर्ता-पाजामा की खरीदारी लोग किया करते थे, लेकिन अनुधकता की बायार में बढ़े फैशन के चलन में यह कतिया सा गया है. कारोबारियों के अनुसार अब इस मौके पर भी जिंस व शर्ट का चलन बढ़ गया है. ग्राहक इस परिधान की ही विशेष मांग करते हैं. गत एक दशक की तुलना करें तो इसमें कुर्ता-पाजामा की डिमांड में लगभग 60 से 70 प्रतिशत की कमी आयी है.
होली पर भी फैशनेबुल कपड़े की डिमांड: होली के परंपरागत परिधान कुर्ता-पाजामा को लेकर पहले करीब एक माह पूर्व से ही मार्केट में कपड़ों की खरीदारी तेज हो जाती थी. लोग बच्चों तक के लिए यह परिधान सिलवाते थे. ससयम कपड़ा सिलाने के लिए दर्जी के यहां कतार सी लगी रहती थी. दर्जी भी दिन-रात मिहनत करते थे. उनके लिए भी होली रंगीन होती थी. लोग होली के दिन इस नये परिधान में रंग-गुलाल खेलते थे, लेकिन अब यह बीते जमाने की बात हो गयी. अब लोग होली पर भी उसी कपड़े की खरीदारी करते हैं जो पर्व के बाद भी आम दिन में उपयोग में आ सके.
व्यवसायियों में छायी मायूसी कुर्ता-पाजामा का चलन हुआ कम
फैशन के रंग में चढ़ी कीमत
अमूमन जहां पहले दो से चार सौ में कुर्ता पाजामा आ जाता था वही फैशन के रंग में ऊंची कीमत पर उपलब्ध है. बच्चों के लिए धोती कुर्ता या कुर्ता पाजामा का 300 से ₹850 तक में मिल रहा है. वहीं वयस्कों के लिए हजार से 14 सौ तक के कुर्ता पाजामा के अलावा एवरेज कम कीमत में 200 से 450 रूपये में बच्चों के लिए एवं 250 से 700 तक में युवाओं के लिए उपलब्ध है.
कारोबार में 60 फीसदी की कमी
मां अम्बे कलेक्शन व सौंदर्य ड्रेसेस के प्रोपराइटर मिहिर ठाकुर एवं मनोज झा बताते हैं कि बाजार में इस बार मंदी का असर है. इस कारण ग्राहक न के बराबर दुकान पर पहुंच रहे हैं. जो आ भी रहे हैं, ऐसे कपड़े की मांग कर रहे हैं जो होली के साथ-साथ अन्य दिन भी पहनने के काम आए. मंदी के कारण इस बार माल की खरीदारी भी करीब 50 से 60 प्रतिशत के करीब ही की है. होली से 5 दिन पूर्व बीते वर्ष जहां दो लाख तक की बिक्री हो गयी थी, वहीं इस बार मात्र 50 से 60 हजार के बीच ही कारोबार हुआ है. शेष दिनों में 5 से 10 हजार से अधिक बिक्री की उम्मीद भी नहीं है. नोटबंदी के कारण बाजार पहले की अपेक्षा मंदा है.
दर्जी को नहीं मिल रहा काम
मोहम्मद नसीरुद्दीन का कहना है, लोग परंपरा से मुंह मोड़ते जा रहे हैं. एक समय था कुर्ता-पाजामा सिलाई को लेकर कारीगरों के साथ कई दिन पूर्व से ही दिन रात लगे रहते थे. फैशन के कारण अब कुर्ता-पाजामा की सिलाई कराने लोग अब न के बराबर आते हैं. इससे हम लोगों के भी व्यापार पर असर हुआ है.
कुर्ता-फाड़ होली ने गिराया ग्राफ
वैसे लोगों का मानना है कि जब से कुर्ता फाड़ होली के चलन ने जोर पकड़ा है, लोग नये परिधान इस मौके पर पहनने से बचने लगे हैं. कुछ साल पूर्व से आरंभ हुए इस चलन ने लोगों को नये कपड़े में पर्व मनाने से रोक दिया है. वैसे इसकी एक वजह मंहगाई भी है. मालूम हो कि पहले जो कुर्ता पाजामा दो से तीन सौ मिल जाता था वह अब सात से नौ सौ रूपये में मिल रहे हैं.

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