कितना तैयार है िवभाग . भगवान भरोसे 33 लाख से अधिक की आबादी
दरभंगा : पछिया हवा की रफ्तार तेज हो गयी है. इसने जिलावासियों की बेचैनी बढ़ा दी है. लोगों को फिर से अगलगी का भय सताने लगा है. पिछले साल की भयावह तसवीरें अभी धुंधली नहीं हुई है. किस तरह एक साथ कई जगहों पर आग लगने से विभाग हाथ खड़ा कर देता था. लोग जब विभाग को फोन करते, तो उधर से कहा जाता गाड़ी दूसरी जगह गयी है, आएगी तो भेज देंगे. मानों आग गाड़ी आने के इंतजार में रुक सकती है. घंटों बाद जब गाड़ी आती तबतक सबकुछ खाक हो जाने पर आग खुद शांत हो गयी रहती थी. लोग अपनी किस्मत तथा व्यवस्था को कोसते रहते थे. सालभर बाद भी व्यवस्था में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है.
सब कुछ वैसा ही है जैसे पिछले साल था. साल 2011 में जिले की आबादी 32.85 लाख थी. 16 साल में कई लाख लोग और बढ़ गये हैं. इतनी बड़ी आबादी अप्रशिक्षित अग्निकों तथा ढीली-ढाली व्यवस्था के हवाले है. विभाग का कहना है कि उचित संसाधनों को ले प्रस्ताव प्रदेश मुख्यालय को लगातार भेजा जाता रहता है.
पिछले साल पांच सौ से अधिक घर हुए थे राख. पिछले साल पांच सौ से अधिक घर राख हो गये थे. विभागीय व्यवस्था दुरूस्त रहती तो इनमें से अधिकांश को बचाया जा सकता था. विभागीय अभिलेख में मात्र 303 घर जलने का मामला दर्ज किया गया है. विभाग की ही माने तो छिटपुट घटनाओं को रिकार्ड में शामिल नहीं किया गया है. सरकारी अभिलेख के अनुसार हनुमाननगर के रामपुरडीह में 150, पटोरी में 75, बिरौल प्रखंड में 16, बहादुरपुर प्रखंड में 36 तथा अलीनगर प्रखंड में 27 घर जल गये.
अगलगी में तीन बच्चों सहित चार की हुई थी मौत. अगलगी में पिछले साल तीन बच्चा सहित चार लोगों की मौत हो गयी थी. बहादुरपुर प्रखंड में एक व्यक्ति की मौत अगलगी से हो गयी थी. वहीं इसी प्रखंड में दो तथा अलीनगर में एक बच्चे की दर्दनाक मौत हो गयी थी.
जिला अग्निशमन कार्यालय में लगीं गाड़ियां.
खुद बरतें सावधानी, घटना पर लगेगी रोक
सुबह आठ बजे से पहले खाना बना लें.
अलाव की आग को पूर्णत: बुझा दें.
फूस के घरों में चूल्हे के चारों तरफ मिट्टी का लेप लगा दें.
रात में दीया या अगरबत्ती जला कर नहीं सोयें.
किचेन में सूती कपड़ा पहन कर काम करें
वस्त्र ढीला-ढाला पहन कर किचेन में काम नहीं करें.
गैस ऑन करने से पहले रिसाव की जांच कर लें.
खाना बनाने के बाद सिलेंडर के नॉब को बंद कर दें.
किचेन में हवा के आने-जाने की बेहतर व्यवस्था रखें.
नौ अग्निशमन गाड़ियां, चालक मात्र तीन
जिला मुख्यालय स्थित अग्निशमन कार्यालय में एक बड़ी तथा दो छोटी गाड़ियां हैं. इनमें भी दोनों छोटी गाड़ियां, कर्मियों के अनुसार भगवान भरोसे हैं. कब चले तथा कब रूठ जाए कहना मुश्किल है. बेनीपुर तथा बिरौल अनुमंडल में दो-दो गाड़ियां हैं. वहीं हायाघाट थाना व लहेरियासराय थाना में एक-एक पिकअप गाड़ियां हैं. चालकों तथा कर्मियों की कमी से विभाग जूझ रहा है. जिला मुख्यालय की तीन गाड़ी चलाने के लिए एक चालक है. जरूरत पड़ने पर होमगार्ड आदि की सहायता से अन्य गाड़ियों का परिचालन कर लिया जाता है.
लोगों को रहना चाहिए सतर्क
उपलब्ध संसाधन में अगलगी की घटना से निबटने के लिए केंद्र पूरी तरह तैयार है. वैसे लोगों को भी सावधान रहना चाहिए. पानी की किल्लत को देखते हुए खाना बनाते समय खासकर पानी से भरी बाल्टी पास रखनी चाहिए. इस तरह की घटना होने पर तुरंत केंद्र को सूचना उपलब्ध करायें.
गौड़ी शंकर चौधरी, अग्निशमन केंद्र प्रभारी
