सफलता. मब्बी ओपी पुलिस ने केतुका स्थित घर से पकड़ा
दरभंगा : जिले के विभिन्न प्रखंडों में हेल्थ सेंटर खोलकर एएनएम की बहाली व फर्जी नियुक्ति पत्र देकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाला शातिर नटवरलाल राजेश कुमार यादव को मब्बी ओपी अध्यक्ष गौतम कुमार ने उसके घर केतुका में गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तारी के बाद राजेश ने पुलिस के सामने कई राज खोले. उसने बताया कि पैसे की लालच में उसने निबंधन कार्यालय से 12 सितंबर 2015 को मां निर्मला मेमोरियल ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन कराया. इसके बाद समस्तीपुर के कल्याणपुर व दरभंगा के
धोई चक्की में कार्यालय खोला. धंधा नहीं चलने पर एक दैनिक समाचार पत्र में एएनएम के पचास पदों पर बहाली का विज्ञापन निकलवाया. विज्ञापन निकलने के बाद एएनएम की बहाली के लिए आवेदकों की लाइन लग गयी. आवेदन शुल्क के नाम पर 50, प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर दो हजार व बहाली के लिए ट्रस्ट में डोनेशन देने के नाम पर 60-60 हजार रुपये लिये. इसके बाद उसने दो दर्जन से अधिक एएनएम की बहाली की.
बता दें कि ट्रस्ट द्वारा लोगों को फर्जी नियुक्ति पत्र देकर ठगने का मामला प्रकाश में आने के बाद इसका परत दर परत खुलने लगा था. ट्रस्ट द्वारा सदर थाना क्षेत्र के केतुका निवासी राम सकल यादव के पुत्र राजेश कुमार यादव ने सिर्फ एएनएम की नौकरी के नाम पर ही लोगों को चूना नहीं लगाया बल्कि उसने लोगों से स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग,
बैंक के साथ नगर निगम में भी नौकरी दिलवाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी की है. सिंहवाड़ा प्रखंड के रामपुरा गांव में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए किराए पर मकान लेने के नाम पर मकान मालिक को दो लाख रुपये का चूना लगाया. वहीं मोरो में माध्यमिक विद्यालय खोलकर लोगों को झांसा दिया. एएसपी दिलनवाज अहमद ने बताया कि ठग राजेश के पास से बहुत सारे फर्जी दस्तावेज मिले हैं.
एएनएम की नौकरी के नाम पर दर्जनों को बनाया शिकार
रामपुरा में मेडिकल कॉलेज खोलने की बनायी थी योजना: अरई, पाराडीह, व डरहार में हेल्थ सेंटर खोलने के बाद सिंहवाड़ा के रामपुरा में निर्मला मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल खोलने की भी उसने योजना बनाई थी. इसके लिए स्थानीय मूरत पंडित से किराये का मकान भी लिया. किराये का पैसे देने के बजाय उसने मूरत के बेटों को नौकरी देने का प्रलोभन देकर उनसे दो लाख रुपये भी ठग लिये.
राजेश ने नौकरी के नाम पर एएनएम को ठगने के बाद उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र देकर, किराये के फर्जी हेल्थ सेंटर में नौकरी दी. कर्मियों को उसने आईकार्ड भी दिया, जिसपर भारत व बिहार सरकार का मोनोग्राम लगा हुआ है. कर्मियों से हाजिरी भी बनवायी और पाराडीह में जनगणना कार्य भी करवाया.
ट्रस्ट के माध्यम से थी ठगी की योजना
शातिर ठग राजेश ट्रस्ट का बायलॉज भी बनवा चुका था. बायलॉज के अनुसार वह समाज सेवा के लिए स्कूल, आईटीआई, पारा मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, आर्युवेदिक कॉलेज, होम्योपैथिक कॉलेज, बीएड कॉलेज, पोलिटेक्निक कॉलेज, फार्मेसी कॉलेज खोलना चाहता था. शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों को स्वावलंबी बनाने के लिए टंकण कला, आशुलिपि, कम्प्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक, मेडिकल एवं अन्य तकनीकी संस्थानों का संचालन भी इसकी योजना में शामिल था. बेरोजगारों को देश-विदेश में नौकरी देने के नाम पर ठगने की योजना थी.
वेबसाइट भी
बना रखा था
भोंदू जैसा दिखने वाला महज बीएससी पास राजेश का दिमाग कम्प्यूटर से कम तेज नहीं है. उसने लोगों को आकर्षित करने के लिये विज्ञापन का सहारा तो लिया ही, डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट एमएनएमटी डॉट बिहार डॉट इन के नाम से वेब साइट भी बनाया. बेव साइट पर जॉब इन बिहार के साथ देश-विदेश में प्रशिक्षित बेरोजगारों को नौकरी देने की भी बात लिख डाली है.
पुलिस पूछताछ में बार-बार बदल रहा बयान
शातिर राजेश गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने भी झूठ बोलने से गुरेज नहीं कर रहा है. वह कभी अपने ममेरे भाई राजाबाबू यादव व कभी सतीश कुमार ठाकुर के भी इस मामले में शामिल होने की बात बता रहा है. लेकिन दोनों के सामने आने पर वह तुरंत अपनी बातों से पलट जाता है. इस बीच वह सबों का रुपये वापस कर देने की भी बात बोलता है, लेकिन कुछ ही देर बाद वह इससे भी मुकर जाता है.
