लनामिवि. वीसी कार्यालय में बधाई देनेवालों का लगा तांता
दरभंगा : लनामिवि के वीसी की कुर्सी प्रो राजकिशोर झा ने संभाल ली है. राजभवन एवं विवि के जारी आदेश के आलोक में प्रो झा पूर्व निर्धारित समय पर विवि मुख्यालय पहुंचे. रविवार का दिन होने के बावजूद प्रो झा के स्वागत के लिए विवि के अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मियों, संबद्ध कॉलेजों के शिक्षाकर्मियों तथा विभिन्न संघ-संगठन के कार्यकर्ताओं की अलग-अलग टोलियां वहां मौजूद थी. प्रो झा का इंतजार लोग फूल-माला लेकर कर रहे थे. लोग बार-बार समय देखकर यह कहरहे कि समय तो हो गया, आखिर वीसी साहेब अभी तक आये क्यों नहीं. उधर वीसी प्रो झा प्रशासनिक भवन के उत्तरी भाग के रासते से गुजर कर अपने कार्यालय में पहुंच चुके थे. इसी बीच वीसी कार्यालय की ओर से किसी ने आवाज लगायी कि साहब चैंबर में पहुंच चुके हैं.
यह सुनते ही स्वागत के लिए खड़े लोग अपने को ठगा हुआ महसूस कर वीसी चैंबर की ओर भागे. प्रो झा को वीसी की कुर्सी पर बैठने को अपनी आंखों से देखने का मौका लोग गंवाना नहीं चाहते थे.
धक्का-मुक्की करते वगैर अपनी बारी का इंतजार किये लोगों ने उन्हें माला पहनाया. कोई हाथ जोड़कर तो कोई पांव छूकर प्रो झा का अभिवादन कर रहे थे. कोई व्यक्तिगत तो कोई सांगठनिक स्तर से प्रो झा का जयकार कर रहे थे. कुलानुशासक एवं कुलसचिव द्वारा कई बार हो-हल्ला को शांत करने के लिए कहा गया लेकिन लोग इतने अधिक उत्साहित थे कि उन अधिकारियों की आवाज कोई सुनने को तैयार नहीं दिख रहे थे. प्रत्येक व्यक्ति दृश्य को अपनी आंखों में कैद करने का प्रयास कर रहा था. फूल-माला पहनाने व अभिवादन का दौर थोड़ा धीमा हुआ तो पं. सोमेश्वर नाथ दधीचि ने स्वस्तिवाचन कर प्रो झा पर पुष्प वर्षा की. इसके बाद कुलसिचव डॉ अजित कुमार सिंह ने वीसी प्रो झा को माला, चादर एवं पाग पहनाकर विवि एवं विवि क्षेत्र के सभी कॉलेजों की ओर से सम्मानित किया. कुलानुशासक डॉ अजयनाथ झा ने विवि का प्रतीक चिन्ह सम्मान स्वरूप वीसी को सौंपा.
तीन तरह के लोगों की संख्या रही सर्वाधिक : वीसी चैंबर में मौजूद लोगों की उपस्थिति कई बातें बयां कर रही थी. सबसे अगली पंक्ति में खड़े अधिकांश लोग सत्ता के सताये, वीसी के इर्द-गिर्द आगे-पीछे करने वाले अधिकांश सत्ता से ललचाये तथा चैंबर के बाहर हाथ में माला लेकर उन्हें पहनाने का इंतजार कर रहे सत्ता से अकुलाए लोग थे. इन सबसे इतर भी लोगों की अच्छी संख्या थी. शिक्षाकर्मियों का चेहरा भयमुक्त दिख रहा था. पूर्व वीसी प्रो साकेत कुशवाहा के कार्यकाल में हंसता दिखने वाला चेहरा मुर्झाया दिख रहा था. कई लोगों के मुंह से यह कहते सुना गया कि वर्षों बाद वीसी चैंबर में प्रवेश का मौका मिला है. अब लगता है कि हमलोग विवि के शिक्षाकर्मी हैं. उनका कहना था कि इससे पूर्व तो ऐसा लग रहा था कि हमलोग प्रो कुशवाहा के कर्मी हैं. विवि मुख्यालय का वातावरण हल्का-हल्का नजर आ रहा था. कथित औपचारिकता तथा बेरहम अनुशासन का बोझा कहीं नहीं दिख रहा था. कई कर्मियों का यह भी कहना था कि तीन साल बाद फिर से लग रहा है कि यह अपना विश्वविद्यालय है.
फूल-मालाओं से विवि कर्मियों ने िकया स्वागत
वीसी की ताजपोशी के
गवाह बने पिता
वीसी प्रो झा के पिता पीजी हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ बम शंकर शंभूदत्ता झा ने कहा कि यह पल काफी प्रसन्नता का है. अपने-आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं. जिस पद तक मैं नहीं पहुच सका वहां तक मेरा पुत्र पहुंच गया. यह हमको देखने का मौका मिला है. इसके बाद वीसी प्रो झा ने अपने को मिथिला का कहते हुए मैथिली में लोगों को संबोधित किया.
