संकट . तालाबों में गिरता है शहर के अधिकतर नालों का पानी
दरभंगा : नगर के बचे-खुचे तालाबों का अस्तित्व समाप्त करने में निगम पूरी तैयारी से जुटा है. उसने नगर के गंदे पानी का मुहाना तालाबों में खोल रखा है. इस कारण कई तालाब मर गये, वहीं कई मरनासन्न हैं. ऐतिहासिक तालाबों की स्थिति चिंताजनक रूप ले चुकी है. वर्षों से नगर की गंदगी धोते-धोते ये तालाब बेदम हो चुके हैं. जिन तालाबों में पहले लोग स्नान कर पवित्र हो जाते थे अब वह खुद पवित्र होने के लिए लोगों को तलाश रहा है. छठ पर्व में लोग डरते-डरते तालाब में प्रवेश करते हैं, लेकिन निकलने पर कई तरह का चर्मरोग साथ लग जाता है. तालाबों का पानी काला हो गया है. पशु-पक्षियों तक के लिए इसका उपयोग खतरनाक हो गया है.
संरक्षण व सौंदर्यीकरण योजना पर काम नहीं : ऐतिहासिक तालाबों की साफ-सफाई तथा सौंदर्यीकरण की बात विभिन्न मंचों तथा संस्थाओं की ओर से लगातार उठायी जाती रही है. बावजूद जिला प्रशासन, नगर निगम या अन्य संस्थाओं की ओर से इस दिशा में जमीनी स्तर पर काम नहीं हो रहा. साल में एक बार छठ के अवसर पर तालाबों के किनारे को जरूर साफ कर दिया जाता है. कुछ जनप्रतिनिधि भी अपनी सीमा में इस पर संवेदना जता चुप लगा जाते हैं.
रेलवे भी जिम्मेदार : नगर के दो तालाब हराही तथा दिग्घी में दरभंगा रेलवे जंकशन का पानी भी बहाया जाता है. डीजल व मोबिल मिश्रित पानी के इन तालाबों बहाये जाने से जलीय जीवों पर विपरीत असर पड़ता है. इसका असर साल में दो-तीन बार देखने को मिल जाता है जब हजारों की संख्या में मछलियां मर जाती है.
तालाबों का कैसे हो संरक्षण
निगम व रेलवे अगर अपने-अपने नालों का मुंह तालाबों की ओर जाने बंद कर ले तो तालाबों की जिंदगी लौट सकती है. इसके लिए योजना के साथ दृढ़ निश्चय जरूरी है. ऐसा तब ही संभव है जब लोग गोलबंद हो दोनों संस्था पर दबाव बनाये.
ऐतिहासिक तालाबों का वजूद खतरे में
तालाबों में नाले की पानी नहीं गिरे इसके लिए काम किया जा रहा है. नाला निर्माण को लेकर डीपीआर बन चुका है. सरकारी प्रक्रिया के कारण देरी हो रही है. जल्द ही इस पर काम किये जाने की संभावना है.
गौड़ी पासवान, मेयर, नगर निगम दरभंगा
