दरभंगा : भाई-बहन का पर्व रक्षाबंधन गुरुवार को उल्लासपूर्वक संपन्न हुआ. अहले सुबह से ही बहने राखी बांधने की तैयारी में जुटी थी. पूजा की थाल सजाकर रोली, तिलक पहले भाई को लगाई फिर राखी बांधकर उसके दीर्घ जीवन की कामना मिठाई खिलाकर की. हाल के वर्षों में वैसे तो अनेक पर्व त्योहारों पर सिनेमा का असर दिखने लगा है, लेकिन रक्षाबंधन मूलत: फिल्मी स्वरुप को ही धारण कर लिया है. अमीर हो या गरीब प्रत्येक घरों में रक्षाबंधन का उल्लास देखते ही बनता था. चौक चौराहों से लेकर लोगों के घरों में भी रक्षाबंधन के गीत गूंज रहे थे.
पंडितों ने भी बांधे रक्षासूत्र
शहरी क्षेत्र में भी ग्रामीण परंपरा दिखी. कई मुहल्लों में पंडितों ने घर-घर जाकर अपने जजमानों के यहां रक्षासूत्र बांधे. पंडित ‘दीनबंधु बली राजा…’ मंत्र का पाठ कर रक्षासूत्र बांधे. पूर्व में गांव में पंडितों के द्वारा ही रक्षाबंधन पर रक्षासूत्र बांधने की प्रथा थी. धीरे-धीरे यह पर्व भाई-बहने के बीच आ गया. इसके बावजूद प्राचीन परंपरा का निर्वहन भी लोग अबतक कर रहें हैं.
जेल गेट तक पहुंची बहना
भाई के प्रति स्नेह और ममत्व ने बहन को जेल गेट तक ला दिया. गुरुवार को कई बहना जिनके भाई किसी कारण से जेल में बंद हैं. उन्हें राखी बांधने के लिए जेल गेट पहुंची. जेलर सहित अन्य अधिकारियों ने बहनों की भावना का सम्मान कर उसके भाई को बहन से मिलने की स्वीकृति दी.
जेल के मेन गेट की खिड़की से हाथ बढा भाई ने बहनों से रखी बंधवाया. यह क्षण बहुत ही मार्मिक था. डबडबाती आंखों से बहना जब भाई को राखी बांधने लगी तो भाई ने उसके उत्साह को बढ़ाया. अन्य कैदी जिनकी बहना वहां तक नहीं पहुंच पायी थी वे दूर खड़े होकर इस भावनात्मक दृश्य को देख रहे थे.
