सुविधा. कचरा प्रबंधन में नगर निगम हुआ आत्मनिर्भर, शहर होगा कचरामुक्त
दरभंगा : नगर निगम बनने के करीब तीस वर्ष बाद कचरा प्रबंधन संचालन में यह आत्मनिर्भर हुआ है. वर्षों से सरकारी उपेक्षा, संसाधनों की कमी एवं टचिंग ग्राउंड के अभाव में दरभंगा नगर निगम सॉलिड वेस्ड मैनेजमेंट संबंधी अर्हता को पूरा नहीं कर पा रहा था.
वैसे राज्य सरकार ने करीब दस वर्ष पूर्व ही सॉलिड वेस्ड मैनेजमेंट के अनुपालन के लिए टंचिंग ग्राउंड की जमीन खरीदने को 50 लाख रूपये नगर निगम को आवंटित किया था जो अबतक निगम खाता की शोभा बढ़ा रहा है. सूत्रों के अनुसार नगर निगम के टंचिंग ग्राउंड के जमीनों पर दबंगों ने कब्जा कर कादिराबाद में महात्मा गांधी कॉलेज तथा गंगवारा में महादलित टोला बसा लिया. चाहकर भी नगर निगम प्रशासन अब इन दोनों कब्जाधारियों को वहां से खाली नहीं करा सकता. इस बीच टंचिंग ग्राउंड जमीन के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने जो अर्हता निर्धारित की है,
उसमें 50 लाख रूपये से टंचिंग ग्राउंड की निर्धारित एक चौथाई जमीन भी उपलब्ध होना मुश्किल है. ऐसी स्थिति में मेयर गौड़ी पासवान ने तात्कालीक व्यवस्था के तहत मब्बी के निकट एक निजी जमीन मालिक से वार्ता कर उस जमीन में कचरा गिराने का काम पिछले सप्ताह से शुरू कराया है.
चालू वित्तीय वर्ष 2016-17 में शहर की सफाई व्यवस्था पर 5.15 करोड़ का प्रावधान किया गया है. इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं आउटसोर्सिंग मद में 2 करोड़, इंधन व्यय डीजल, पेट्रौल पर 1.50 करोड़, कुदाली, बेलचा, बाल्टी, झाड़ू, चूना मद में 38 लाख,भाड़ के वाहनों पर 80 लाख, नालों की साफ सफाई पर 5 लाख तथा वाहनों के मरम्मति पर 40 लाख का प्रावधान किया गया है. इस बीच सॉलिड वेस्ड मैनेजमेंट की राशि से बुडको ने करीब दो करोड़ से अधिक की राशि का सफाई उपस्कर नगर निगम को भेजा है.
बजट में सफाई पर है 5़.15 करोड़ का प्रावधान
मॉनीटरिंग होगी तो नहीं होगी परेशानी
इतने उपलब्ध वाहनों से यदि दृढ़ इच्छाशक्ति के तहत निगम प्रशासन शहर को चकाचक करने को संकल्पित हो तो उसे पूरा करने में कठिनाई नहीं होगी. वर्तमान में संविदा पर कार्यरत एवं स्थायी सफाई मजदूरों की जो फौज नगर निगम के पास है, यदि नियमित मॉनिटरिंग के तहत शहर की सफाई करायी जाय तो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की उत्कृष्टता में दरभंगा का नाम शामिल हो सकता है. अब देखना है कि इतने सफाई उपस्करों को नगर निगम प्रशासन किस रूप में प्रयोग करता है. जो भाड़े के वाहनों पर जो 80 लाख का प्रावधान किया गया है, उस राशि की बचत हो सकती है.
