असुविधा. बारिश में टपकता है स्टेशन का शेड
लहेरियासराय रेलवे स्टेशन का हाल
रोज 2000- 2200 यात्री कटाते हैं सामान्य टिकट
300-500 यात्री कराते हैं आरक्षण
10000-12000 लोग आते जाते हैं
आठ जोड़ी सवारी गाड़ी व पांच जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव
टिकट घर के समीप व प्लेटफाॅर्म पर जगह-जगह जमा पानी
दरभंगा : दरभंगा-समस्तीपुर रेलखंड पर स्थित लहेरियासराय स्टेशन पर इन दिनों यात्रियों को सामान रखने तक की जगह नहीं मिल रही. पूरे स्टेशन परिसर की फर्श पर पानी जमा रहता है. वर्षा के दौरान खुद को पानी से बचाना यात्रियों के लिए कठिन होता है. इसके लिए विभाग की ओर से कोई पहलदकमी धरातल पर नजर नहीं आ रही, जबकि यह शहर मुख्यालय का प्रमुख स्टेशन है. यहां प्रतिदिन दस हजार से अधिक यात्री आवागमन करते हैं. जाहिर तौर पर रेलवे को अच्छी आय होती है. बावजूद विभाग ध्यान नहीं दे रहा है.
शेड से टपकता है पानी: बड़े भू-भाग में फैले इस स्टेशन पर वैसे तो एक ही प्लेटफाॅर्म है, जिसपर शेड लगा है. पूरा शेड जगह-जगह से टपकता है. कई जगह पर तो फव्वारा की तरह पानी का रिसाव बरसात के क्रम में होता रहता है. आलम यह हो जाता है कि प्लेटफार्म पर सीधे प्रवेश का मुख्य मार्ग पर पानी जमा रहता है. टिकट घर के समीप व पूरे प्लेटफार्म पर जगह-जगह पानी जमा रहता है. इस कारण सामान रखना भी यात्रियों के लिए मुश्किल होता है.
शहर का प्रमुख स्टेशन : दो मुख्यालयों में बंटे इस शहर में लहेरियासराय का क्षेत्र अधिक महत्वपूर्ण है. उत्तर बिहार के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान डीएमसीएच से लेकर जिला का प्रशासनिक महकमा, कमिश्नरी, अदालत के अतिरिक्त प्राय: सभी सरकारी विभागों का कार्यालय लहेरियासराय में स्थित है. आबादी भी इस क्षेत्र की बड़ी है. अगल-बगल के तीन दर्जन गांव का यह स्टेशन है. मधुबनी व समस्तीपुर से बड़ी संख्या में यात्री काम-काज के लिए लहेरियासराय स्टेशन पर आते-जाते हैं.
रेलमंत्री ने की थी प्रमुख गाड़ियों के ठहराव की घोषणा: दरभंगा से पांच किलोमीटर दक्षिण स्थित इस स्टेशन का आज तक विकास नहीं हो सका. प्रमुख गाड़ियों के ठहराव की तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद द्वारा घोषणा किये जाने के बावजूद यह आज तक लागू नहीं किया जा सका. इसके लिए क्षेत्रवासियों ने कई बार आवाज भी उठायी. वरीय पदाधिकारियों के समक्ष डिमांड भी रखी, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा.
