लापरवाही. 15 अप्रैल को हुई चंदन की माैत
दरभंगा : नशामुक्ति वार्ड के मरीजों के उपचार व्यवस्था की गाइड लाइन एक अप्रैल से शुरू होती तो शायद डीएमसीएच के इस वार्ड के मरीज चंदन महासेठ(32) की मौत 15 अप्रैल को नहीं होती. सवाल इतना पर ही नहीं है बल्कि ऑन काल पर किसी वरीय डाक्टरों ने सुधि नहीं ली. इधर अंतत: नशामुक्ति वार्ड में इलाजरत चंदन महासेठ ने दम तोड़ दिया. इसकी सूचना जब सरकारी को भेजी गयी तो स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी. स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों ने दो दिन पूर्व आयोजित वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग में इस वार्ड के उपचार व्यवस्था के नये गाइड लाइन का पालन करने की सलाह दी.
ऑन कॉल की नहीं ली सुधि
मरीज चंदन महासेठ को 11 अप्रैल को गंभीर हालत में इस वार्ड में भरती कराया गया था. नशापान के आदत से मरीज के कई अंदरूनी अंग बेकाम हो गया था. मरीज की हालत 14 अप्रैल की सुबह से और खराब होती चली गयी. इस वार्ड के एक डाक्टर ने हेल्थ मैनेजर को मोबाइल पर मरीज की स्थिति की जानकारी दी.
हेल्थ मैनेजर ने डाक्टर को अस्पताल अधीक्षक को सूचना देने की
सलाह दी. अस्पताल अधीक्षक को उसी समय इसकी सूचना दे दी गयी. अस्पताल अधीक्षक ने मेडिसीन के डाक्टरों को ऑन कॉल करने की सलाह दी. इस वार्ड के कर्मी शंकर मेडिसीन आइसीयू पहुंचे. एक पीजी छात्र ने इमरजेंसी वार्ड में वरीय डाक्टरों की खोज में भेज दिया. कर्मी को टरका देने का नजारा यहां तक ही नहीं थमा. कर्मी भागते-भागते इमरजेंसी वार्ड पहुंचा. इमरजेंसी वार्ड के एक पीजी छात्र ने कर्मी को लेकर एक वरीय डाक्टर के पास पहुंचे.
वरीय डाक्टर ने दो टूक जवाब दे कर्मी को फिर मेडिसीन आइसीयू में भेज दिया. हारकर इस यूनिट के पीजी छात्र ने वरीय डाक्टर से मरीज को देखने की सलाह मोबाइल पर ली. पीजी छात्र ने उस दिन शाम को नशामुक्ति वार्ड के गंभीर मरीज की जांच कर एंटीबायोटिक दवा लेने की सलाह दे चले गये.
इसके बाद 15 अप्रैल की सुबह 10.10बजे मरीज ने दम तोड़ दिया. इस वार्ड के नोडल ऑफिसर सह मनोचिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डा. उपेंद्र पासवान ने 16 अप्रैल को इस मौत की सूचना दी.
क्या है नयी गाइड लाइन
नये गाइड लाइन के अनुसार ऐसे मरीजों का इलाज पहले इमरजेंसी वार्ड में करना जरूरी हे. मरीज के स्टेबुल के बाद ही नशामुक्ति वार्ड में भेजना है. गंभीर मरीजों को किसी भी हालात में नशामुक्ति वार्ड में सीधे भरती नहीं करना है. इसके अलावा कई अन्य उपचार व्यवस्था को लेकर दिशा निर्देश दिये गये हैं.
पहले क्या था
गाइड लाइन
ऐसे मरीजों को इमरजेंसी या ओपीडी में पुरजा कटाकर मरीजों को सीधे नशामुक्ति वार्ड में भरती कराना है. इसको लेकर कोई भी डाक्टर ऐसे मरीजों की सुधि नहीं लेते थे.
गंभीर हालत में भरती हुआ था मरीज
इस वार्ड के नोडल ऑफिसर डा. पासवान ने बताया कि मरीज को गंभीर हालत में ही भरती कराया गया था. इसकी सूचना वीडियो कान्फ्रेसिंग और एक रिपोर्ट के माध्यम से दी गयी थी. इसके अलावा मरीज की मौत की सूचना 15 अप्रैल को 2.15 बजे दिन में अस्पताल अधीक्षक को कार्यालय में भेजी गयी थी. अस्पताल अधीक्षक डाॅ एसके मिश्रा ने बताया कि 14 अप्रैल को गंभीर मरीज की सूचना किसी ने नहीं दी थी.
