अल्ट्रासाउंड जांच के लिए हलकान बने मरीज

अल्ट्रासाउंड जांच के लिए हलकान बने मरीज केंद्रीयकृत जांच घर में 4 मशीने लगे इमरतेंसी व गायनिक वार्ड जांच विहीन दरभंगा. डीएमसीएच में अल्ट्रासाउंड जांच के नये मशीनों की संख्या चार हो गयी है. इन मशीनों की आपूर्ति वार्डों के जरूरत के हिसाब से किया गया था ताकि समान्य से गंभीर मरीजों को इस जांच […]

अल्ट्रासाउंड जांच के लिए हलकान बने मरीज केंद्रीयकृत जांच घर में 4 मशीने लगे इमरतेंसी व गायनिक वार्ड जांच विहीन दरभंगा. डीएमसीएच में अल्ट्रासाउंड जांच के नये मशीनों की संख्या चार हो गयी है. इन मशीनों की आपूर्ति वार्डों के जरूरत के हिसाब से किया गया था ताकि समान्य से गंभीर मरीजों को इस जांच के लिए भाग -दौड़ नहीं करना पड़े और ऑन दी स्पॉट ही मरीजों को इस जांच की सुविधा उपलब्ध हो जाये. लेकिन मरीजों की इस सुविधा पर पानी फिर गया. आपूर्ति की गयी इन चारों मशीनों को रेडियोलॉजी विभाग में शिफ्टकर दिया गया. जांच के इस केंद्रीयकरण के कारण गायनिक, शिशुरोग और इमरजेंसी वार्ड अल्ट्रासाउंड विहीन हो गया. बढ़ी मरीजों की परेशानी 10 साल पूर्व अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधाएं तीन वार्डों में थी. इधर यह सुविधा समाप्त होने से मरीजों को रेडियोलॉजी विभाग में दौड़ लगानी पड़ती है. गायनिक वार्ड में हरेक मरीजों को डाक्टर अल्ट्रासाउंड जांच करोन की सलाह देते हैं. इस वार्ड में मरीजों को 400 से 500 गज की दूरी पर रेडियोलॉजी विभाग में यहां जांच करना पड़ता है. इस जांच में प्रसूता पेट में मरे हुए बच्चे आदि कई ऐसे गंभीर मरीज होते हैं. उधर नवजात शिशुओं को भी यह जांच कराने शिशु रोग वार्ड से आना पड़ता है. परेशानी इतना ही नहीं है, इमरजेंसे वार्ड में गंभीर मरीजों का तांता लगा रहता है. ऐसे केस में मरीजों को अन्यत्र ले जाना मरीजों की जान जोखिम में डालना है. कबतक है यह सुविधा केंद्रीयकृत इस जांच की सुविधा सुबह 9 बजे से दिन के दो बजे तक ही है. रविवार व अन्य अवकाश के दिनों में मरीज इस जांच से सुविधाविहीन रहते हैं. विकेंद्रीकरण की कहां थी सुविधाएं दस साल पूर्व इस जांच की सुविधाएं इमरजेंसी वार्ड, शिशु रोग वार्ड और गायनिक वार्ड में थी. इमरजेंसी वार्ड के इस जांच घर में दवा भंडार है. गायनिक वार्ड और शिशु रोग वार्ड का अल्ट्रासाउंड जांच घर में ताले लटके हैं. शिशु रोग वार्ड का अल्ट्रासाउंड मशीन सात साल पूर्व रेडियोलॉजी विभाग में शिफ्ट हो गया था. गायनिक वार्ड का यह जांच घर में ताले लटके हैं. क्या कहते हैं एचओडी डा. राजीव रंजन ने बताया कि गायनिक वार्ड में रेडियोलॉजी को इस जांच के लिए लगाया गया था लेकिन तकनीकी कारणों से रेडियोलॉजिस्ट को वापस ले लिया गया है. अन्य वार्डों में इस जांच की सुविधा देने के प्रश्न पर स्पष्ट तर्क नहीं दे सके.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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