कबीर अंत्येष्टि लाभ को पड़े लाले सामान गिरबी रखने को विवश हैं पीड़ित परिजन बेनीपुर. प्रशासनिक कुव्यवस्था एवं लचर कार्य संस्कृति के कारण नगर परिषद एवं पंचायत के गरीबाें को आज भी अपने परिजनों की मौत पर उनके कफन की व्यवस्था करने के लिए दर-दर भटकना पड़ता है. जबकि इसी परिस्थिति से निबटने के लिए सरकार द्वारा कबीर अंत्येष्टि योजना का प्रावधान किया गया. इस योजना के तहत किसी बीपीएल धारी परिवार के सदस्य की मौत पर तत्काल 3 हजार रुपये देने का प्रावधान किया गया है, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण उक्त राशि कहीं पंचायत सचिवों की तो कहीं विकास मित्रों के झोले में घूम रही है और गरीब कफन के लिए महाजनों के पास गिड़गिड़ाने को मजबूर हो रहें हैं. सूत्रों की माने तो नगर परिषद से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के सभी पंचायतों मेें उक्त मद की राशि का कोई कमी नहीं है. नगर परिषद के विभिन्न वार्डों से पार्षदों द्वारा लाखों की राशि वापस की गयी है. प्रखंड में किसी भी पंचायत में डिमांड लंबित नहीं होने का दावा प्रखंड के बाबू कर रहें हैं. अब प्रश्न यह उठता है कि यदि राशि का अभाव नहीं तो महीनों से लोग इसके लिए क्यों भटक रहे हैं. वार्ड 7 के ठक्को सदाय जिनका निधन अक्टूबर 15 को, वार्ड 16 की बुचनी देवी जिनका निधन 4 अप्रैल 15 को, मायाराम पासवान के परिजन अप्रैल 15 से वार्ड 7 के रामलोचन झा 15 दिनों से वार्ड 27 की दुर्गा देवी वार्ड 4 से शेख मंगनू की बीबी कनीजा खातून तो गणेश बनौल बलनी कंथूडीह के जंगली देवी एवं फूलो देवी के परिजन क्यों उक्त राशि के लिए प्रशासनिक महकमा के मोहताज बने हुए हैं. इस संबंध में बीडीओ प्रदीप कुमार झा एवं कार्यपालक अधिकारी शैलेश झा के संपर्क करने पर जिला की बैठक में होने की बात कही.
कबीर अंत्येष्टि लाभ को पड़े लाले
कबीर अंत्येष्टि लाभ को पड़े लाले सामान गिरबी रखने को विवश हैं पीड़ित परिजन बेनीपुर. प्रशासनिक कुव्यवस्था एवं लचर कार्य संस्कृति के कारण नगर परिषद एवं पंचायत के गरीबाें को आज भी अपने परिजनों की मौत पर उनके कफन की व्यवस्था करने के लिए दर-दर भटकना पड़ता है. जबकि इसी परिस्थिति से निबटने के लिए […]
