तीखी धूप में झुलस रहे धान बंद पड़े हैं सरकारी नलकूपडीजल अनुदान भी नहीं मिला किसानों कोफोटो- 11परिचय-बंद पड़े राजकीय नलकूपफोटो संख्या- 12 से 17 तक परिचय- स्थानीय किसानों की तसवीर बहादुरपुर. अनावृष्टि से पीले पड़े धान के पौधे एवं तीखी धूप में झुलस रहे उसके पत्तों के प्रति विभाग कतई संजीदा नहीं है. किसी तरह झुलसने से फसल को बचाये रखने वाले किसानों को डीजल अनुदान का एक छटांक तक मुआवजा महकमा ने नहीं दिया है. लापरवाही का यह जीता जागता नमूना है. साथ ही इसकी गैर संजीगदगी का बहादुरपुर प्रखंड क्षेत्र के कुशोथर पंचायत में लगा राजकीय नलकूप प्रमाण दे रहा है. सभी संसाधन युक्त होने के बावजूद इस नलकूप से किसानों की फसल को तीन वर्षों में पानी का एक बूंद तक नसीब नहीं हो सका है. हालांकि क्षेत्रवासियों को बिजली विभाग ने हजारों का बिजली बिल जरूर थमा दिया है. इस पंचायत के दोनों नलकूप काम के न काज के दुश्मन अनाज के वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है. 2007 में निर्माण कराया था दो नकलूप का निर्माणकुशोथर पंचायत के योगियार व कुशोथर गांव में दो राजकीय नलकूप वित्तीय वर्ष 2007 में निर्माण कराया. पांच वर्ष बीत जाने के पश्चात 2012 में दोनों नलकूपों पर बिजली कनेक्ट कर दिया गया. दोनों नलकूपों में पाईप लाइनिंग कर पूर्णत: संचालन करने के लिए तैयार किया गया. उसके बाद से 2015 तक एक दिन के लिए नलकूप से पानी नहीं निकला. दोनाें नलकूपों में अंडरग्राउंड पाइपिंग लगभग दो सौ फीट में किया गया है. नलकूप नहीं चालू होने से दोनों गांवों के लगभग 800 बीघा जमीन में ससमय खेती नहीं हो पाती है. स्थानीय लोग दोनों नलकूपों को हाथी के दांत की तरह निहारते रहते हैं. ग्रामीणों में आक्रोशइधर दोनों नलकूप चालू नहीं होने से स्थानीय किसानों में आक्रोश नजर आ रहा है. पंचायत के मुखिया बसंत कुमार झा दोनों नलकूप चालू कराने को लेकर विभाग के सभी पदाधिकारियों का दरवाजा खटखटा चुके हैं. उन्होंने बताया कि अगर रब्बी की खेती के समय नलकूप संचालन नहीं होती है तो इसके लिए उग्र आंदोलन किया जायेगा. इन दोनों नलकूपों का संचालन नहीं होने से स्थानीय किसानों में खेती के प्रति उदासीनता बढ़ती जा रही है. किसान अर्जुन झा, सरोज कुमार झा, रामकलित झा, नारायणजी चौधरी, रामकांत झा, दिलीप कुमार झा आदि सहित दर्जनों किसानों ने अपनी अपनी समस्या रखी. उन्होंने कहा कि खेती करना अब मुश्किल हो गया है. सरकार द्वारा योजनाएं तो चलायी जा रही है, लेकिन किसानों के बीच आते आते समाप्त हो जाती है. वर्षों से पूर्णत: निर्माणाधीन नलकूप तैयार है. परंतु एक दिन भी किसानों को इसका फायदा नहीं मिला है. इसके लिए लगभग 800 सौ एकड़ खेती बारी प्रभावित होती है. मालूम हो कि बहादुरपुर प्रखंड क्षेत्र में 23 पंचायतों में 20 राजकीय नलकूप है. नलकूप विभाग के अनुसार चार नलकूप चालू है, जबकि धरातल पर एक भी नलकूप का संचालन नहीं हो रहा है. बहुत ऐसे नलकूप है जहां नाला नहीं है तो कहीं बिजली से भी नहीं जोड़ा गया है.
तीखी धूप में झुलस रहे धान
तीखी धूप में झुलस रहे धान बंद पड़े हैं सरकारी नलकूपडीजल अनुदान भी नहीं मिला किसानों कोफोटो- 11परिचय-बंद पड़े राजकीय नलकूपफोटो संख्या- 12 से 17 तक परिचय- स्थानीय किसानों की तसवीर बहादुरपुर. अनावृष्टि से पीले पड़े धान के पौधे एवं तीखी धूप में झुलस रहे उसके पत्तों के प्रति विभाग कतई संजीदा नहीं है. किसी […]
