रिसर्च का नकलची बनाने से परहेज करें : वीसी

रिसर्च का नकलची बनाने से परहेज करें : वीसी छात्रों को शोध के प्रति करें आकर्षित डीएमसी में रिसर्च मेथोडोलॉजिकल विषय पर कार्यशाला फोटो- 26 व 27परिचय- सेमिनार का उद्घाटन करते लनामिवि वीसी प्रो. साकेत कुशवाहा व अन्य एवं उपस्थित चिकित्सक. दरभंगा. छात्र-छात्राआें को रिसर्च के प्रति आकर्षित करना शिक्षकों का दायित्व है. रिसर्च का […]

रिसर्च का नकलची बनाने से परहेज करें : वीसी छात्रों को शोध के प्रति करें आकर्षित डीएमसी में रिसर्च मेथोडोलॉजिकल विषय पर कार्यशाला फोटो- 26 व 27परिचय- सेमिनार का उद्घाटन करते लनामिवि वीसी प्रो. साकेत कुशवाहा व अन्य एवं उपस्थित चिकित्सक. दरभंगा. छात्र-छात्राआें को रिसर्च के प्रति आकर्षित करना शिक्षकों का दायित्व है. रिसर्च का नकल नहीं करें. जानकारी होने पर वैसे नकलची रिसर्च छात्रों की गिरफ्तारी हो सकती है और नौकरी करनेवाले की नौकरी जा सकती है. मेडिकल एजुकेशन, यूनिट की ओर से दरभंगा मेडिकल कॉलेज (डीएमसी) में शनिवार को आयोजित वर्कशॉप के रिसर्च मेथोडोलॉजिकल विषय पर लनामिवि के कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा ने यह बातें कही. मेडिकल छात्रों को रिसर्च करने की प्रक्रिया बताते हुए कुलपति प्रो. कुशवाहा ने कहा कि उन खाद्य पदार्थों का रिसर्च करें और दवा के बदले ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन कराने की सलाह दें. एक ही दवा अलग अलग करता है प्रभावित एक ही दवा हरेक लोगों में एक समान प्रतिक्रिया से प्रभावित नहीं करता है. प्रत्येक लोगों के शरीर के रेसिस्टेंस पॉवर अलग अलग होते हैं. अफ्रिकी देश के लोगों को 1000 एमजी पावर का पारासिटामॉल दिया जाता है, लेकिन भारत के लोगों को यही दवा 50 से 200 एमजी पावर की दी जाती है. शोध ऐसे लोगाें पर भी होना चाहिए यह भिन्नताएं भौगोलिक वातावरण को लेकर है.खाद्य पदार्थ पर हो शोध विभिन्न तरह के खाद्य पदार्थ पर शोध होना चाहिए. यह शरीर को किस प्रकार से प्रभावित करता है. ऐसे खाद्य पदार्थ गुणकारी है. शरीर के लिए नुकसानदेह है. यह शोध का विषय होना चाहिए. ऑयल सिंगापुर से आयात किया जा रहा है. यह ऑयल लोगाें को किस प्रकार से प्रभावित करता है. यह भी शोध का विषय बनना चाहिए. शोध के प्रति आकर्षित करेंशिक्षक छात्रों को शोध के प्रति आकर्षित करें. रिसर्च करने वाले समाज के प्रति जिम्मेवार हैं. शोध वह विज्ञान है जो समाज के साथ जोड़ता है. शोध के कार्य नियमत: होना चाहिए. नियम से विमुख होने पर शोध में विफलता मिलने की संभावना बनी रहती है. शोध के प्रति रुचि नहीं कुलपति का शोध पर व्याख्यान चल रहा था. लेक्चर थियेटर के पीछे बैठे एक दो छात्र 15-15 मिनट पर खिसक रहे थे. बीच में कुलपति ने तपाक से कहा कि एक तो यहां कम छात्र आये हैं. जो छात्र आये हैं उसमें से कई छात्र पीछे से खिसक रहे हैं. व्याख्यान के दौरान छात्रों का मोबाइल घनघना रहा था. कुलपति ने छात्रों को मोबाइल साइलेंट मोड में रखने की सलाह दी. रात में किया स्लाइड तैयार कुलपति ने कहा कि उनका व्यस्ततम कार्यक्रम के बावजूद भी वह रात में इस कार्यशाला के लिए नेट पर अध्ययन कर स्लाइड तैयार किये हैं. उनका समय काफी महत्वपूर्ण है. मुझे काम करना है. मैं यह समझूं कि कोई मेरी बात नहीं सुन रहा है. इसलिए अपना काम नहीं करें ऐसा नहीं है. देश और छात्रों के लिए काम करता रहूंगा. मोमेंटों खोलकर देंप्राचार्य डा. आरके सिंहा ने कुलपति को कागज में वेद मोमेंटों प्रदान किया. कुलपति प्रो. कुशवाहा ने सलाह दी जो इसे खोलकर दें. कुलपति को कोई भी गिफ्ट या बंद मोमेंटों दे तो इसे खोलकर दें यह नियम है. इसके पूर्व कुलपति, प्राचार्य सहित अन्य डॉक्टरों ने कार्यशाला का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया. पीएसएम विभाग के एचओडी डा. चितरंजन राय ने कहा कि थेसिस को कॉलेज में छात्रों द्वा२उास नकल की जाती है. नकल ऐसा कि पुराने थेसिस के शब्द भी नहीं बदलता है. इस कारण दूसरे मेडिकल कॉलेज में यहां के थेसिस का मजाक बनाया गया था.इस मौके पर मेडिसीन के एचओडी डा. बीके सिंह, मेडिसीन के पूर्व एचओडी डा. एके गुप्ता, एमइयू के सचिव डा. एसडी सिंह, एचओडी डा. अजित कुमार चौधरी, एचओडी डा. केएन मिश्रा, एचओडी डा. वीएस प्रसाद सहित पीजी छात्र उपस्थित थे. मंच संचालन डा. वंदना ने की.

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