रोजा व नमाज से इम्तहान लेते हैं अल्लाह

/रफोटो संख्या- 04 से 08 तक परिचय- नन्हें रोजेदारों की तसवीर दरभंगा: रमजान की फजिलत व बरकत साल के बारह माह में एक ऐसा माह है, जिसमें अल्लाह अपने बंदों के सबसे करीब होते हैं. अल्लाह ताला अपने बंदों का रमजान के माह में रोजे, नमाज, तरावीह व जकात फितरा के जरिये इम्तेहान लेते हैं. […]

/रफोटो संख्या- 04 से 08 तक परिचय- नन्हें रोजेदारों की तसवीर दरभंगा: रमजान की फजिलत व बरकत साल के बारह माह में एक ऐसा माह है, जिसमें अल्लाह अपने बंदों के सबसे करीब होते हैं. अल्लाह ताला अपने बंदों का रमजान के माह में रोजे, नमाज, तरावीह व जकात फितरा के जरिये इम्तेहान लेते हैं. जो बंदे उनकी इस इम्तेहान में कामयाब हो जाता है वो दिन व दुनिया में कामयाबी पाता है. नन्हें राजेदारों का रोजे से लगाव अल्लाह को सबसे ज्यादा पसंद है. अल्लाह के हुक्म का पालन करना हर वो बंदे की फर्ज है तो हजरत मोहम्मद सल्लाहो अलैहेबसल्लम की उम्मत है. रमजान एक ऐसा पर्व है जिसे हर धर्म के लोगों द्वारा एहतेराम किया जाता है. इस महीने में दुनिया वालों के लिए आसमान से कुरआन उतारा गया था. अल्लाह अपने बंदों को पुकारते हैं, कोई मुझसे अपनी कामयाबी मांगने वाला है, कोई जन्नत मांगने वाला है, कोई गुनाहों की माफी मांगने वाला है.नन्हें रोजेदारों का जज्बा काबिलेतारीफ नन्हें रोजेदारों में बाकरगंज मसजिद के पीछे बाजार में भी रोजे रखे हैं. मो शारीक (10) ने भी सात रोजे रखे हैं. वहीं मो फरहान(8) ने आठ रोजे रखे. उनसे पूछा गया कि रोजे क्यों रखे तो उसने बताया कि रमजान में रोजा रखना, सेहरी में उठना अच्छा लगता है. यह दूसरा साल है, जब रोजा रखा है. मो एकम(11) ने बताया कि रोजा हमपर फर्ज किया गया है. इसलिए रखा हूं और अच्छा लगता है. मो महसूद्दीन (7) ने पहली बार रोजा रखा है. घर में सब खुश हैं और इफ्तार करना, सबके साथ मसजिदों में नमाज पढ़ना अच्छा लगता है. वहीं सादिया हसन(9) भी पीछे नहीं है. उसने 2 रोजे रखे हैं. उसने कहा कि भूख-प्यास हमें नहीं भटका सकती है. आगे भी रोजे रखते रहेंगे.

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