सुप्रीम कोर्ट करायेगी नवअंगीभूत कॉलेजों में अवैध भुगतान की फॉरेंसिक जांच

नियुक्ति, वेतन निर्धारण, सेवा सामंजन, वेतन भुगतान आदि की जांच को विशेष टीम गठित दरभंगा :न्यायमूर्ति एसबी सिन्हा आयोग की अनुशंसा के आलोक में चतुर्थ चरण के नव अंगीभूत कॉलेजों के रेफर्ड एवं अलाउड केस के तहत सेवा सामंजित शिक्षाकर्मियों के एटेंडेंस सहित जमा अभिलेखों की जांच अब फॉरेंसिक टीम करेगी. वहीं नियुक्ति, वेतन निर्धारण, […]

नियुक्ति, वेतन निर्धारण, सेवा सामंजन, वेतन भुगतान आदि की जांच को विशेष टीम गठित

दरभंगा :न्यायमूर्ति एसबी सिन्हा आयोग की अनुशंसा के आलोक में चतुर्थ चरण के नव अंगीभूत कॉलेजों के रेफर्ड एवं अलाउड केस के तहत सेवा सामंजित शिक्षाकर्मियों के एटेंडेंस सहित जमा अभिलेखों की जांच अब फॉरेंसिक टीम करेगी. वहीं नियुक्ति, वेतन निर्धारण, सेवा सामंजन, वेतन भुगतान, एटेंडेंस आदि अभिलेखों की जांच के लिए अलग से चार सदस्यीय टीम गठित की गयी है. जांच टीम में बिहार एवं झारखंड के अधिकारी को शामिल नहीं किया जाएगा.

टीम में सीबीआई, सीएजी, ईडी एवं केंद्रीय सचिव स्तर के एक- एक अधिकारियों को शामिल करने का निर्देश दिया गया है. गठित टीम के जांच अधिकारियों को 15 अक्टूबर 2019 तक जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा करने का निर्देश दिया है. यह आदेश सुप्रीम कोर्ट ने कृष्णानंद यादव बनाम राज्य सरकार के अवमाननावाद मामले में दिया है. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से बिहार के 28 एवं झारखंड के 12 यानी कुल चतुर्थ चरण के 40 नव अंगीभूत कालेजों के रेफर्ड एवं अलाउडकेस वाले शिक्षाकर्मी प्रभावित होंगे.

लनामिवि के डेढ़ सौ शिक्षाकर्मी जांच के दायरे में

जांच के दायरे में लनामिवि के एमएलएसएम कालेज, दरभंगा एवं जेएमडीपीएल कॉलेज मधुबनी के करीब डेढ़ सौ शिक्षाकर्मी आने वाले है. न्यायादेश की जानकारी मिलते ही संबंधित शिक्षाकर्मियों में हड़कंप मच गया है. जानकारी के अनुसार कागजात में हेरफेर कर संबंधित अधिकांश कर्मचारियों ने लाखों रुपये का भुगतान उठा लिया है.

लौटाना पड़ सकता भुगतान लिया गया करोंड़ों रुपया

जानकारों के अनुसार इस कोटि के जितने शिक्षाकर्मियों ने गलत स्टेटमेंट ऑफ फैक्ट्स के आधार पर सेवा सामंजन कराते हुए बकाए वेतन मद का एरियर प्राप्त कर लिया है उन्हें भुगतान ली गयी राशि लौटानी पड़ सकती है. जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित शिक्षा कर्मियों द्वारा पहले से जमा शपथ पत्र के आधार पर कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई भी हो सकती है. संबंधित शिक्षाकर्मियों को अपनी नौकरी भी गंवानी पर सकती है. संबंधित कॉलेजों के प्रधानाचार्य एवं विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है.

वैसे विश्वविद्यालय के अधिकारी अपने आपको फिलहाल यह सोचकर सुरक्षित महसूस कर रहे हैं कि सेवा सामंजन प्रधानाचार्य द्वारा समर्पित स्टेटमेंट ऑफ फैक्टस के आधार पर किया गया है. साथ ही बकाए वेतन मद के एरियर का भुगतान भी कॉलेज स्तर पर प्रधानाचार्य ने ही किया है.

नियुक्ति तिथि से काम करने वालों के वेतन भुगतान से हटी रोक

न्यायालय ने वैसे कर्मचारी जो नियुक्ति की तिथि से लगातार काम करते आ रहे हैं तथा उनका सेवा सामंजन एसबी सिन्हा आयोग की अनुशंसा के तहत ही हुआ है, उनके नियमित वेतन भुगतान पर लगी रोक हटा ली है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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