लोस चुनाव समाप्त होने के बाद भी नहीं हुए काउंटर पर प्रतिनियुक्त कर्मियों के दर्शन
आनन-फानन में काउंटर खोल कर सो गया प्रशासन, सरकार की मंशा पर फिर रहा पानी
कुशेश्वरस्थान : पंचायतों में खोले गये प्राय: आरटीपीएस केंद्र उद्घाटन के साथ ही बंद हो गये हैं. लिहाजा लोगों को इस सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है. प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाना ही पड़ रहा है. बदन झुलसाने वाली जानलेवा साबित हो रही तेजाबी धूप में लंबी दूरी तय कर ब्लॉक जाना पड़ता है.
इस झंझट से निजात दिलाने के लिए पंचायतों में खेला गया आरटीपीएस काउंटर किसी काम का नहीं रहा गया है. मालूम हो की बिहार सरकार ने सभी पंचायतों में 26 जनवरी 2019 तक आरटीपीएस काउण्टर चालू कर इससे संबंधित सभी कार्यों के निष्पादन का निर्देश दिया था. इस आलोक में आनन-फानन में पंचायतों में काउंटर खोल दिये गये. इसके संचालन के लिए कर्मियों की भी प्रतिनियुक्ति कर दी गयी, लेकिन आलम यह है कि अधिकांश काउंटर पर ताला झूल रहा है.
कहां हैं प्रतिनियुक्त कर्मी, पता नहीं : अधिकांश पंचायतों में अबतक कम्पूयटर भी नहीं लगा है. इन पंचायतों में प्रतिनियुक्त डाटा ऑपरेटर, लेखपाल भी पंचयतों से नदारद हैं. ये कहां हैं, इसकी जानकारी न तो पंचायत के मुखिया को है औन न ही बीडीओ को ही पता है.
प्रखंड कार्यालय पर लगी रहती है कतार : इस कारण सहजता से पांचयत में ही आरटीपीएस कॉउण्टर पर जो काम हो जाता, उसके लिए आग उगलती धूप में प्रखण्ड के काउण्टर पर 14 पंचायतों के लोगों की लम्बी कतार लगी रहती है. सरकार के लाख प्रयास के बावजूद लोगों को प्रखण्ड की दौड़ लगानी पड़ रही है.
पंचायत भवन से निराश लौट जाते हैं क्षेत्रवासी : औराही के कामेश्वर मुखिया बताते हैं कि पंचायत में खोला गया आरटीपीएस काउण्टर लोगों के लिए छलावा साबित हो रहा है. देवकान्त यादव बताते हैं कि उद्घाटन के दूसरे दिन से ही ताला नहीं खुला है. वार्ड सदस्य रामजतन तांती, अमीरूल हक का कहना है कि पंचायत के आरटीपीएस काउण्टर पर खुलने के बाद से एक दिन भी आवेदन नहीं लिया गया है.
लोग पंचायत भवन की दौड़ लगा बैरंग वापस लौट जाते हैं. डाटा ऑपरेटर व लेखापाल का दर्शन तक नहीं हो पाया है. ऐसे में सरकार के द्वारा लोगों के सुविधा के लिए घोषित पंचायतों का आरटीपीएस काउण्टर उद्घाटन के साथ दम तोड़ रहा है.
