दरभंगा : गंभीर मामले के अनुसंधान में एफएसएल जांच की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. कई बाद घटनास्थल पर साक्ष्य के अभाव में अपराधी को लाभ मिल जाता है. वैज्ञानिक अनुसंधान से असली गुनाहगारों की गिरेबान तक पहुंचा जा सकता है. उक्त बातें एसएसपी मनोज कुमार ने समाहरणालय में पुलिस पदाधिकारियों के वैज्ञानिक अनुसंधान प्रशिक्षण के मौके पर कही. एसएसपी श्री कुमार ने कहा कि पुलिस को सपने नहीं आते. न ही वह जानती है कि किसने हत्या की.
लेकिन, हत्या के बाद घटनास्थल पर मौजूद साक्ष्यों से असली कातिल तक पहुंचा जाता है. बशर्ते साक्ष्यों को सही तरीके से इकट्ठा किया गया हो और उसे जांच के लिए एफएसएल को भेजा जाये. ये सब फॉरेंसिक लैब का कमाल है, जिसके जरिये वैज्ञानिक अनुसंधान ने पुलिस के अनुसंधान को आइने की तरह साफ बना दिया है. मौके पर एफएसएल मुजफ्फरपुर के क्षेत्रीय एफएसएल पदाधिकारी इंजय कुमार ने पुलिस पदाधिकारियों को एफएसएल जांच की बारीकियों को समझाया. बताया कि घटना के बाद किस तरह से साक्ष्य को इकठ्ठा करें. मौके पर सहायक निदेशक राम पनपन ओझा, एडिशनल डायरेक्टर सुनील कुमार, मुख्यालय डीएसपी प्रफुल्ल कुमार सिन्हा, एसडीपीओ सदर अनोज कुमार आदि मौजूद थे.
हत्या के बाद इन बातों का ध्यान रखें पुलिस अधिकारी
कत्ल के बाद घटनास्थल को हर हाल में सुरक्षित रखें.
घटनास्थल की हर एंगल से फोटोग्राफी करावें.
साक्ष्य खोजने के लिए वृत्त के रूप
में गोल घेरा बनाकर सबूत को
जमा करें.
घटनास्थल का स्कैच बनावें.
खून के सैंपल लेने के लिए पट्टी में स्लाइल वाटर को लगाकर इसे सुखाने के बाद पैक करें.
