संक्रमण . केवटी में एचआइवी रोगियों की संख्या पर ब्रेक नहीं
दिल्ली, मुंबई व कोलकाता जाने वाले मजदूर अधिक प्रभावित
प्रभावित होने वालों में महिला व बच्चे भी शामिल
केवटी : प्रखंड क्षेत्र एचआइवी रोगियों का जोन बना हुआ है. सरकारी आंकड़े पर ही नजर डाले तो भी स्थिति भयावह है. अब तक 200 से अधिक एचआइवी मरीजों को चिह्नित कर बेहतर इलाज के लिए डीएमसीएच के एआरटी सेंटर भेजा जा चुका है. जानकारों की माने, तो निजी चिकित्सा संस्थानों में करीब इतने की मरीज इलाजरत हैं. बताया जाता है कि रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता आदि शहर जाने वाले कई लोग वापसी में एचआइवी लेकर लौटते हैं. पत्नी के माध्यम से होते हुए बच्चों तक बाद में यह बीमारी प्रवेश कर जाता है. आंकड़े बताते हैं कि गर्भवती महिला की संख्या भी कम नहीं है.
परामर्शी व लैब टेक्नीशियन कर रहे इलाज
प्रखंड मुख्यालय के समीप स्थित सामुदायिक चिकित्सा केवटी रनवे केंद्र में वर्ष 2007 से एचआइवी मरीजों की जांच की सुविधा उपलब्ध है. एक परामर्शी व एक लैब टेक्निशियन इस कार्य को देख रहे हैं. मरीजों की नि:शुल्क जांच कर रिपोर्ट दी जाती है. मरीजों की काउंसेलिंग की जाती है.
पेंशन को ले अबतक भेजे गये 84 फॉर्म
सरकार की ओर से पीड़ितों व उनके बच्चों को सरकारी सहायता देने का प्रावधान है. शताब्दी पेंशन योजना के तहत मरीज को 15 सौ रुपये मासिक पेंशन दिया जाता है. वहीं परवरिश योजना में मरीज की मृत्यु हो जाने पर बच्चों को नौ सौ रुपये तथा बच्चे अगर 12 वर्ष से ज्यादा के हों तो मासिक एक हजार रुपये पेंशन दिया जाता है. केंद्र सरकार कि ओर से मरीज को दवा के लिये पच्चीस हजार रुपये की सहयोग राशि दी जाती है. केवटी में अभी तक कुल 84 फार्म पेंशन स्वीकृति के लिये जिला को भेजा गया है.
क्षेत्र में एनजीओ भी सक्रिय
सीएचसी केवटी रनवे में जांच केंद्र के अलावा दो एनजीओ भी इलाके में जागरूकता तथा मरीजों की खोज में जुटा है. एनजीओ प्लान इंडिया तथा निर्देश इस क्षेत्र में कार्यरत है. प्लान इंडिया की ओर से रैयाम मुहम्मदपुर में दो बार शिविर लगाया है. शिविर में जांच के दौरान कई मरीज चिह्नित किये गये थे.
इन गांवों में अधिक रोगी चिह्नित
मुहम्मदपुर, असराहा, पैगबरपुर व रैयाम गांव में ज्यादा मरीज चिह्नित किये गये हैं. बताया जाता है कि इन गांवों के लोग रोजी-रोटी की तलाश में अधिक संख्या में महानगरों को जाते हैं. कई महिला मरीजों ने बताया कि ससुराल वाले तो दूर मायके वाले भी दूरी बरतते हैं. जिंदगी घुटन में व्यतीत हो रही है.
परवरिश लाभ लेने के लिये नाबालिग बच्चे का बैंक खाता नहीं खुल रहा है. जांच केंद्र में ग्लोबल सीरिंज कभी-कभार ही रहने से मरीज को बाहर से इनकी खरीदारी करनी पड़ती है.
ये है सरकारी आंकड़े
वर्ष मरीज पुरुष महिला
2015 21 13 08
2016 19 12 07
2018 18 14 04
कहते हैं परामर्शी
सीएचसी केवटी रनवे में एकीकृत जांच एवं परामर्श देने वाले राजनारायण मिश्रा कहते हैं कि सीमित संसाधन में कर्मियों के सहयोग से बेहतर कार्य किया जा रहा है. लोगों के बीच जागरूकता लाकर मरीजों के प्रति सोच बदलने की जरूरत है. करीब पांच साल से जागरूकता कार्यक्रम के लिए संसाधन नहीं दिया गया है.
