जल्द ही शुरू होगा अधूरे पड़े नये डुमरिया सेतु का निर्माण, टेंडर से पूर्व NHAI तलाश रहा हर विकल्प

सेतु निर्माण को लेकर पांचवीं बार टेंडर निकालने से पूर्व एनएचएआइ हर विकल्प को तलाश रहा है ताकि इस बार हर हाल में सेतु का निर्माण कार्य पूरा हो जाये.

गोपालगंज. डुमरिया में गंडक नदी पर नये सेतु के निर्माण का सपना जल्द साकार होगा, क्योंकि इस बार इसके निर्माण की उम्मीदें प्रबल हैं.

सेतु निर्माण को लेकर पांचवीं बार टेंडर निकालने से पूर्व एनएचएआइ हर विकल्प को तलाश रहा है ताकि इस बार हर हाल में सेतु का निर्माण कार्य पूरा हो जाये. बता दें कि डुमरिया में गंडक नदी पर बनने वाले नये सेतु का निर्माण कार्य 2011 से बंद है.

नये सेतु के निर्माण को लेकर एनएचएआइ अब तक चार बार टेंडर निकाल चुका है, लेकिन कोई संवेदक तैयार नहीं हुआ.

पांचवी बार टेंडर निकालने से पूर्व धंसे पाये की जानकारी लेने, अधूरे सेतु का निरीक्षण कर निर्माण पर चर्चा करने के लिये एनएचएआइ के अधिकारियों के साथ उच्च तकनीकी सलाहकारों की टीम गुरुवार डुमरिया पहुंची और सेतु निर्माण के विकल्प पर चर्चा की.

अब तक के लिये निर्णय के अनुसार जहां से नये सेतु का पाया धंसा है, वहां से शेष निर्माण कार्य पुराने जगह के बजाय थोड़ा सा बाये-दायें जगह बदलकर नये सिरे से किया जायेगा.

एनएचएआइ की ओर से दावा किया गया है कि हर हाल में इसी वित्तीय वर्ष में सेतु निर्माण को लेकर टेंडर निकाल दिया जायेगा और नये वित्तीय वर्ष में काम शुरू हो जायेगा.

2008 में शुरू हुआ था नये सेतु का निर्माण

इस्ट वेस्ट कोरिडोर परियोजना के अंतर्गत गंडक नदी से गुजरने वाली एनएच 28 के लिए गंडक नदी पर नये सेतु का निर्माण वर्ष 2008 में शुरू हुआ था.

वर्ष 2011 में निर्माणाधीन सेतु का एक पाया अचानक धस गया. उसके बाद निर्माण कंपनी पीसीएल काम छोड़ कर फरार हो गयी. तब से यह काम लटका हुआ है.

एक नजर डुमरिया के पुराने सेतु पर

  • 1974 में पूरा हुआ था पुराने सेतु का निर्माण

  • एक दशक से पुराना सेतु बना है जर्जर

  • 2016 में सीओ ने पुराने सेतु के स्वींग करने की भेजी थी रिपोर्ट

  • सेतु के 65 फीसदी रेलिंग हैं गायब

  • हर रोज लगता है जाम

  • प्रतिदिन गुजरती हैं 12 से 16 हजार तक वाहनें

  • हो चुके हैं कई हादसें

बोले अधिकारी

एनएचएआइ के परियोजना निदेशक मनोज कुमार पांडेय ने कहा कि अधूरे सेतु निर्माण के लिये पांचवी बार टेंडर निकालने से पूर्व उच्च तकनीकी सलाहकारों की देखरेख के बाद निर्माण को लेकर हर विकल्प पर चर्चा हुई.

जल्द ही इसके लिये टेंडर निकाला जायेगा. तीन सौ मीटर लंबाई में सेतु का निर्माण नये सिरे से होगा, जिसकी जगह में थोड़ा बदलाव होगा.

Posted by Ashish Jha

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By Prabhat Khabar News Desk

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