पेरीफेरल एरिया में भूमि निबंधन का गिर गया ग्राफ

बगहा : नगर परिषद और नगर पंचायत एवं उसके चार किमी दूर में अवस्थित ग्रामीण क्षेत्र की भूमि निबंधन शुल्क में तीन गुना वृद्धि हुई है. शहर के सटे कई गांवों को भी शहर के अनुरूप मान लिया गया है. सुविधाएं गांव की है और भूमि निबंधन शुल्क शहर के मुताबिक. इस वजह से भूमि […]

बगहा : नगर परिषद और नगर पंचायत एवं उसके चार किमी दूर में अवस्थित ग्रामीण क्षेत्र की भूमि निबंधन शुल्क में तीन गुना वृद्धि हुई है. शहर के सटे कई गांवों को भी शहर के अनुरूप मान लिया गया है.

सुविधाएं गांव की है और भूमि निबंधन शुल्क शहर के मुताबिक. इस वजह से भूमि का निबंधन कराने में लोगों काफी परेशानी हो रही है. नया भूमि निबंधन शुल्क एक फरवरी से लागू हुआ है. खास कर शहरी क्षेत्र की भूमि निबंधन कराने के लिए कोई रजिस्ट्री ऑफिस नहीं आ रहा है. रजिस्टार कुमार दीनबंधु ने बताया कि निकाय क्षेत्र और पेरिफेरल एरिया में निबंधन शुल्क की बढ़ोतरी एक फरवरी से की गयी है.

शुल्क में बढ़ोतरी के कारण संबंधित इलाके से रजिस्ट्री की संख्या में कमी आयी है. हालांकि भूमि निबंधन की संख्या में कोई कमी नहीं है. शहरी क्षेत्र से करीब चार किमी दूर के इलाके की भूमि निबंधन के शुल्क में इजाफा हुआ है. शुल्क की वृद्धि सरकार के निर्देश के आलोक में हुई है.

नहीं मिल रहा खरीदार : रामचंद्र साह(बदला नाम). रामनगर शहर से तीन किमी दूर सोनखर में इनकी जमीन है. बेटी की शादी के लिए इन्होंने जमीन बेचने की योजना बनायी.

ग्राहक तो मिल गये. सौदा भी तय हो गया. लेकिन जब रजिस्ट्री कराने के लिए बगहा आये और यहां निबंधन शुल्क के बारे में जानकारी मिली तो खरीदार इनकार कर गया. जितनी भूमि की कीमत गांव स्तर पर निर्धारित की गयी थी. उससे अधिक रजिस्ट्री का खर्च लग रहा था. इस वजह से खरीदार वापस चला गया. भूमि की बिक्री नहीं हो सकी.

खेस्टा बना बेच दी जमीन : भूमि निबंधन शुल्क बढ़ने के कारण इन दिनों खेस्टा का प्रचलन भी बढ़ने लगा है. भूमि की खरीद बिक्री खेस्टा पर हो रही है. मसलन, दो सौ के स्टांप पेपर पर ग्रामीण प्रबुद्ध लोग एवं पंचों की मौजूदगी में जमीन की खरीद बिक्री हो रही है. हालांकि उस आधार पर लगान रसीद आदि तो नहीं कट सकता. लेकिन भूमि पर कब्जा मिल जाता है.

दरअसल, बाद में इस खेस्टा को लेकर समस्या खड़ी हो सकती है.

अगर खरीदार के वंशज इस मामले को लेकर गंभीर हुए तो भूमि स्वामित्व की लड़ाई आरंभ होगी. यह खेस्टा की प्रथा भूमि विवाद के मामलों में इजाफा करने वाला है.

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बगहा में शहर से जुड़े गांव

औसानी, मंगलपुर, पोखर भिंडा, सुखवन, गोइती, तुर्की, समरकोल, रामपुर, छतरौल एवं चखनी.

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रामनगर में शहर से जुड़े गांव

विशुनपुरवा, धोकराहा, बंजरिया, सोनखर एवं डैनमरवा.

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फरवरी माह में प्राप्त राजस्व

वर्ष राशि

2014 1 करोड़ 16 लाख

2015 1 करोड़ 02 लाख

2016 77 लाख

(डाटा स्रोत: रजिस्ट्री कार्यालय बगहा)

बोले अधिकारी

निबंधन शुल्क में इजाफा सरकार के निर्देश के आलोक में हुआ है. जिन क्षेत्रों की भूमि के निबंधन शुल्क में बढ़ोतरी हुई है, वहां से भूमि निबंधन की रफ्तार में कमी आयी है. लेकिन राजस्व पर इसका कोई प्रभाव नहीं है.

कुमार दीनबंधु, रजिस्टार, बगहा

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