थम गया चुनाव प्रचार का शोरगुल
बगहा : शाम के करीब छह बज रहे हैं, पिछले 13 दिनों से चुनावी भोपू की शोर गूल से परेशान लोगों को राहत मिली. बगहा के स्टेट बैंक चौराहा और सिनेमा चौक पर अब चुनावी भोपू का शोर भी थम चुका है. इसी के साथ उम्मीदवार और उनके कार्यकर्ता – समर्थकों का कॉन्वाइसिंग अभियान तेज […]
बगहा : शाम के करीब छह बज रहे हैं, पिछले 13 दिनों से चुनावी भोपू की शोर गूल से परेशान लोगों को राहत मिली. बगहा के स्टेट बैंक चौराहा और सिनेमा चौक पर अब चुनावी भोपू का शोर भी थम चुका है. इसी के साथ उम्मीदवार और उनके कार्यकर्ता – समर्थकों का कॉन्वाइसिंग अभियान तेज हो गया.
हालांकि लंबे समय से मौन साधे मतदाता अब धीरे – धीरे खुलने लगे हैं.
देश और राज्य के राजनीतिक समीकरण तो है ही, लेकिन स्थानीय समस्याओं की अंबार भी अपने ढंग से मतदाताओं को प्रभावित कर रही हैं. इसके इतर जातीय गोलबंदी , क्षेत्रवाद का भी मतदाताओं पर प्रभाव दिख रहा है. इस प्रकार प्रत्याशियों के खुल कर प्रचार करने का समय पूरा हो चुका है. अब मतदाताओं की बारी है.
एक नवंबर को मतदान केंद्रों पर जाकर अपना फैसला सुनायेंगे. हालांकि मतदाताओं को रिझाने में चुनावी दंगल में उतरे प्रमुख दलों के प्रत्याशियों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है. लेकिन खासकर बगहा को जिला एवं परसौनी, बखरी, सेमरा और हरनाटांड़ को प्रखंड तथा धनहा को अनुमंडल का दर्जा नहीं मिलने को लेकर निराश जरूर हैं. बगहा का स्टेडियम, अपनी बदहाली और उपेक्षा को लेकर बेचैन जरूर है.