इंटर में नामांकन की बेचैनी

इस बार मैट्रिक में पास हुए हैं 27 हजार छात्र-छात्राएं बेतिया : मैट्रिक के नतीजे आने के साथ ही अब छात्र इंटर में नामांकन की माथापच्ची में जुट गये हैं. छात्रों की सबसे बड़ी परेशानी इंटरमीडिएट के सीटों को लेकर है. वैसे तो जिले के साठ से ज्यादा हाई स्कूलों में प्लस टू की पढ़ाई […]

इस बार मैट्रिक में पास हुए हैं 27 हजार छात्र-छात्राएं
बेतिया : मैट्रिक के नतीजे आने के साथ ही अब छात्र इंटर में नामांकन की माथापच्ची में जुट गये हैं. छात्रों की सबसे बड़ी परेशानी इंटरमीडिएट के सीटों को लेकर है.
वैसे तो जिले के साठ से ज्यादा हाई स्कूलों में प्लस टू की पढ़ाई शुरू करने का विभागीय दावा है. लेकिन हकिकत धरातल पर कुछ और ही है. प्लस टू का दर्जा पाये दर्जन भर स्कूलों में प्लस टू की पढ़ाई की कोई सुविधा नहीं है. जिन स्कूलों में नामांकन लिया जाता है वे भी शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं. खास कर विज्ञान संकाय मे प्लस टू के अधिकांश विद्यालयों में शिक्षक नहीं है. वहीं अधिकांश स्कूलों में छात्रों की रुचि के बावजूद कॉमर्स की पढ़ाई की व्यवस्था नहीं है. अब बचे कॉलेज तो कॉलेजों में इंटरमीडिएट की सीटे काफी सीमित है.
जिले में कई वित्त रहित इंटर कॉलेज भी है. लेकिन उनकी शिक्षा व्यवस्था सिर्फ नामांकन व फार्म भरने तक ही सीमित है. तीन, चार, पांच कमरों वाले वित्त रहित इंटर कॉलेज भले ही बोर्ड से संबद्धता प्राप्त कर लिये हो लेकिन पढ़ाई के नाम पर कोई भी व्यवस्था उनके पास नहीं है. यह अलग बात है कि बोर्ड की मिली भगत से ऐसे इंटर कॉलेजों से प्रति वर्ष हजारों छात्र परीक्षा में शामिल होते है. लेकिन पढ़ाई के लिए उन्हें ट्यूशन व कोचिंग संस्थाओं पर ही निर्भर रहना पड़ता है.
इस बार मैट्रिक परीक्षा में करीब 27 हजार छात्र उत्तीर्ण हुए है. जबकि इंटर पढ़ाई वाले शिक्षण संस्थाओं में उपलब्ध सीट उससे काफी कम है. लिहाजा छात्रों की परेशानी वाजिब है.बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने की चाह रखने वाले अभिभावक इस व्यवस्था को लेकर काफी परेशान है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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