बेतिया : लाल बाजार के व्यवसायी राजेश चौधरी व वीणा चौधरी ने बताया कि इससे पहले वे कभी इतना नहीं डरे हुए थे. राजेश ने कहा कि घर में सारी सुख सुविधा होते हुए मौत के डर से घर छोड़ दिये. पत् नी वीणा चौधरी के साथ वे दो दिनों से जोड़ा शिवालय मंदिर परिसर में ही डेरा डाले हुए है. बाहर रहने वाले बेटा व बेटी को लगातार फोन पर सर्तक रहने की हिदायत दे रहे थे. वीणा ने कहा पहली बार धरती डोली तो एहसास नहीं हुआ. लेकिन जब उसका क्रम कुछ देर जारी रहा तो चक् कर आने लगा.
हर आहट पर घर छोड़ देते थे हम दोनों
बेतिया. कृश्र्चन क्ववार्टर में रहने वाले मोरबेन पीटर व उनकी पत् नी किरण मोरबेन ने कहा कि, पहली बार मैनें आंखों के सामने धरती को डोलते हुए देखा था. 26 अप्रैल की दोपहर धरती डोली तो लगा सचमुच ऐसा होता है. किरण तो बार-बार अपने दिल पर हाथ रख. इस डरावनी भूकंप की आहट को महसूस करने लगती थी. उनके पति मोरबेन ने कहा किरण के चलते वे सारी रात सड़कों पर ही टहल के गुजार दिये. जब भी धरती डोलती बाहर में रह रहा छोटा बेटा प्रशांत की याद सताने लगती थी.
दिल से नहीं निकल रहा भूकंप का डर
बेतिया : बानूछापर मुहल् ला में रहने वाले अधिवक्ता रविंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा, जब भूकंप आयी तो वे कचहरी में थे. मोबाइल भी काम नहीं कर रहा था. मन बेचैन हो गया, घर में बुढ़ी मां और बच्चे है. कैसे भागेंगे. सोच कर आंख भर आये. लेकिन जैसे ही झटका थमा राहत की सांस ली और काम धाम छोड़ घर आ गये. तब तक बेटी अल्पना भागते हुए आयी लिपट कर रोने लगी. आज भी वह इस झटका से सहमी हुई है. पत् नी सिंधु बाला ने कहा कि भूकंप के वक्त वे घर में ही थी. बुढ़ी मां और बच्चे को लेकर घर से निकालने में ही परेशान हो गयी थी. लग रहा था कि अब नहीं बचेंगे.
