बगहा : शनिवार की सुबह भूकंप का झटका महसूस होते अनुमंडलीय अस्पताल की विचित्र स्थिति थी. अस्पताल के प्रसव वार्ड में भरती मरीजों को छोड़ कर लोग भग रहे थे. कई मरीज अपने नवजात को गोद में लेकर वार्ड से बाहर निकली.
हालांकि प्रसव वार्ड में आम तौर पर आशा और ममता की सर्वाधिक भीड़ रहती है. इस दिन भी ये सभी थी. मरीज और उनके परिजनों से नोक झोंक का माहौल था. तभी भूकंप का झटका महसूस हुआ. भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गयी. कुछ इसी तरह के हालात ओपीडी के भी थे. वहां मरीजों को लाइन लगा था.
जब महसूस हुआ कि भवन हील रहा है तो हाथ में परची लेकर दवा लेने जाने के बजाय लोग खुले की ओर भागे. अनुमंडलीय अस्पताल की बिल्डिंग में भी भूकंप की वजह से कई जगह दरारें आ गयी हैं. कुछ इसी तरह की हालत अन्य अस्पतालों की भी है.
हरिनगर : भूकंप के झटके का असर यह था कि ओपीडी से मरीज भागने लगे थे. हालांकि अंग्रेजों के जमाने के भवन में यहां ओपीडी का संचालन होता है. ताजुब्ब यह है कि उस भवन की दीवारों पर कोई असर नहीं है.
जबकि महज पांच- सात वर्ष पूर्व बने आरसीएच भवन की दीवारों में कई जगह दरारें दिख रही हैं. आरसीएच में भरती पांच महिलाएं अपने नवजात को लेकर भवन से बाहर निकल गयी. एएनएम व अन्य भी आरसीएच से बाहर निकल गये थे.
हरनाटांड़ : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के नव निर्मित भवन में कई जगह भूकंप के झटके की वजह से दरारें आ गयी. सुबह में करीब 10 – 12 मरीज अस्पताल के गेट पर जा कर बैठ गये थे.
अभी चिकित्सक नहीं आये थे. इस लिए मरीज उनके आने की प्रतीक्षा में थे. तभी अचानक भूकंप का झटका आया. गेट के सामने बैठी प्रमिला देवी नामक एक महिला हिलने लगी. फिर वह चिल्लाई , अरे भागो , भूकंप आया है. फिर भगदड़ मच गयी. हालांकि आधे घंटे बाद चिकित्सक आये तो वे अपनी आप बीती बताने लगे.
हो गयी थी छुट्टी
बेतिया. स्कूल व कॉलेज में भूकंप से पहले ही छुट्टी हो चुकी थी. शनिवार का दिन होने के कारण सभी स्कूल हाफ डे तक ही चले. इस कारण स्कूली बच्चे 11.30 बजे तक अपने घर पहुंच चुके थे. वही जिन स्कूल व कॉलेज में छुट्टी नहीं हुई थी सभी बच्चों को भूकंप के झटका का एहसास होते ही बाहर निकल जाने का निर्देश स्कूल प्रशासन के द्वारा दे दी गयी.
