ढिबरी युग में जी रहे पिड़ारीवासी

कहां है विकास : आजादी के बाद अब तक नहीं पहुंची गांव में बिजली मैनाटांड़ : प्रखंड क्षेत्र का ग्राम पिड़ारी आजादी के बाद से आज भी बिजली जैसे मूलभूत सुविधा से वंचित है. गांव की दस आबादी ढिबरी युग में जीवन बसर करने को मजबूर है. कारण कि जनप्रतिनिधि के संग ही प्रशासन भी […]

कहां है विकास : आजादी के बाद अब तक नहीं पहुंची गांव में बिजली
मैनाटांड़ : प्रखंड क्षेत्र का ग्राम पिड़ारी आजादी के बाद से आज भी बिजली जैसे मूलभूत सुविधा से वंचित है. गांव की दस आबादी ढिबरी युग में जीवन बसर करने को मजबूर है. कारण कि जनप्रतिनिधि के संग ही प्रशासन भी उदासीनबना हुआ है. नतीजा आजादी के छह दशक बाद भी गांव में बिजली नहीं पहुंच सकी है.
पोल लगा तो जगी थी उम्मीद
15 वर्ष पूर्व गांव में कुछ जगह जब पोल लगना शुरू हुआ तो ग्रामीणों को उम्मीद जगी. उनके बच्चे भी बिजली की रोशनी में पढ़ाई कर अपना मुकाम हासिल करेंगे. पोल अब आंधी में टेढ़े हो गये लेकिन बिजली नहीं आ सकी.
लोगों ने सुनाया दर्द
महावीर प्रसाद : विद्युत विभाग के उपेक्षा पूर्ण रवैया के कारण पिड़ारी गांव में विद्युत बहाल नहीं हो पायी है. जबकि अगल-बगल के छोटे से छोटे गांवों में भी विद्युत का लाभ लोगों को मिल रहा है.
अशोक कुमार : चुनाव के दौरान तो नेताजी ने विकास की खूब वकालत की थी. लेकिन हकीकत यह है कि कोई हमारे बारे में नहीं सोचता. इक बिजली भी तो गांव में नहीं पहुंच सकी है.
प्रमोद पटेल : लालटेन के सहारे पढ़ाई करना पड़ता है. इससे केरोसिन का भी खर्च बढ़ गया है. कम से कम अधिकारियों को इसपर पहल करनी चाहिए
मनोज कुमार : बस 100 मीटर की दूरी पर स्थित दूसरे गांव में बिजली आती है. शाम को जब वह गांव बिजली के उजाले में होता है तो हमारे मन में टीस उठती है. पर क्या करें?
राजेश साह : ई-क्रांति के इस युग में हमारा गांव बिजली जैसी सुविधा से वंचित है. कम्प्यूटर, इंटरनेट तो दूर गांव के लोग मोबाइल चार्ज करने के लिए दूसरे गांव या फिर शहर जाते हैं.

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