प्रभात परिचर्चा .’ प्रभात खबर’ की ओर से आयोजित परिचर्चा में किसानों ने बांटा अपना दुख-दर्द
कभी खेती-किसानी की तरक्की व खुशहाली से पूरे देश में अपनी पहचान रखने वाला चंपारण आज मायूस सा दिखा. मन में अजीब बेचैनी थी. कम उपज का दुख चेहरे पर साफ झलक रहा था. ‘ प्रभात खबर ’ ने मौका दिया तो किसानों ने बेबाकी से अपना पूरा दर्द बयां कर डाला.
जिला प्रशासन व सरकार पर आरोपों की बौछार की. कहा कि कोई किसानों की हित को सोचने वाला नहीं है. किसानी घाटे का सौदा है, हम तो किसानी महज खेतों पर कब्जे के लिये करते हैं. परिचर्चा से निकल कर आया कि मौसम की मार गेहूं की फसल पर पड़ी है. सुझाव मिला कि हरी खाद लगाकर इसकी भरपाई की कोशिश होगी.
बेतिया : किसानी में लगातार में इजाफा हो रहा है. मौसम की मार से जूझते हैं. उत्पाद के बाद अनाज की उचित मूल्य नहीं मिलता. फिर संभावनाओं की तलाश में किसान करते हैं कि अगली बार लाभ मिल जाय.लेकिन रवि के फसल ने जिले के किसानों की उम्मीद व संभावनाओं पर पानी फेर दिया है.करीब 60 फीसदी किसानों के खेतों में गेहूं की बाली में दाने नहीं हैं. अगर गेहूं की बाली में दाने भी आये हैं,तो पुष्ट नहीं हैं. अब किसानों का सरकारी सहायता व मुआवजे पर नजर टीका हुआ है.
दलहन व तेलहन भी दे गया दगा
मौसम की मार पहले दलहन व तेलहन के फसल पर पड़ा.मसूर का उत्पादन जहां एक एकड़ में महज 10 से 15 किलो हुआ. वहीं तेलहन का उपज आठ से 12 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से उपज हुआ. मक्का के फसल में भी कीट लग गया है.
गन्ना की मिठास पर पाइरीला का हमला
जिले के किसानों के लिए एक मात्र नगदी फसल गन्ना है. गन्ने के फसल में बीमारी लग गया है. गन्ने के फसल में बीमारी लगने से किसान परेशान हैं.
किसानों ने सवालों ने बीएओ को छकाया
परिचर्चा में किसानों को सुझाव देने आये प्रखंड कृषि पदाधिकारी अशोक कुमार सहनी को किसानों के सवालों से जूझना पड़ा. बारी-बारी से किसानों ने खेती से जुड़े सवाल उठाये. श्री सहनी के संतोषजनक उत्तर पाकर किसान संतुष्ट दिखे.
अनुदान नहीं मिलने का उठा मुद्दा
किसानों ने परिचर्चा में सरकारी अनुदान का पूरा लाभ नहीं मिलने का मुद्दा उठाया. शिकायती लहजे में कहा कि अनुदान का पूरा लाभ तो बिचौलिये उठाते हैं. हमारे पास तो महज 15 फीसदी अनुदान का लाभ ही पहुंच पाता है.
