बगहा/पिपरासी : गंडक नदी के श्रीपतनगर बालू घाट पर मंगलवार को करीब एक दर्जन के आसपास ट्रैक्टर – टेलर बालू लादने के लिए खड़ा था. मजदूर किसानों के खेत से बालू की निकासी कर रहे थे.
श्रीपत नगर के हरि बीन, शंभु बीन आदि मजूदर ने बताया कि यह तो होना हीं था. ओवर लोडिंग रोकने के नाम पर बीडीओ साहब हद कर दिये थे. पिपरासी प्रखंड का श्रीपतनगर घाट सबसे बड़ा बालू घाट है. यहां से रोज करीब 100 टेलर बालू की निकासी होती है. यहां से बालू यूपी व अन्य जगह जाता है. हाल के दिनों में बीडीओ साहब हद कर दिये थे. रोज एक बार घाट पर आते थे. एक दो ट्रेलर रोक देते थे. कहते थे कि ओवर लोडिंग है.
इस वजह से मजदूरों की मजदूरी मारी जाती थी. दिन भर कठिन परिश्रम कर बालू लादने वाले मजदूर फिर टेलर पर लदे बालू को उतारते थे. ऐसे में मजदूरों में गुस्सा था. कुछ युवा मजूदर भी आये थे. बेवजह बीडीओ साहब ने टेलर रोक दी. मजदूर बालू उतारने जा रहे थे तो बोले के चालान कटेगा. मसलन , अब मजदूरों को मजदूरी भी नहीं मिलने वाली थी. इसी पर आक्रोश भड़का और जबरन मजूदरों ने टेलर पार करा दिया.
बस, यहीं वास्तविक घटना है. श्रीपतनगर घाट पर बालू की लोडिंग करने वाले मजदूर हरि बिन, शंभु बिन, सुरेश चौहान आदि ने भी इसकी पुष्टि की और कहा कि ओवर लोडिंग रोकने के नाम पर दबंगई हो रही थी. उधर, मजदूरों ने बीडीओ के द्वारा थाने में गलत ढंग से प्राथमिकी दर्ज कराने के विरोध में एक बैठक की और निर्णय लिया कि अब ऐसी मनमानी नहीं चलेगी और लड़ाई के मूड में मजदूर
बालू लादने वाला मजदूर जनक राय , शंभु सहनी आदि ने बताया कि यह हमारी आजीविका से जुड़ा हुआ है. एक टेलर पर 115 सीएफटी बालू लोड किया जाता है.
चूंकि बालू को दूर ले जाना है, वह हवा में उड़ता और तेज रफ्तार में वाहन चलाने पर दबता है. इस लिए थोड़ा अधिक लोड किया जाता है. इसी लोडिंग को बीडीओ समेत अन्य अधिकारी ओवर लोडिंग करार देकर गरीब मजदूरों के मुंह का निवाला छीनने पर आतुर है. मजदूरों ने बताया कि पिछले 15 वर्ष से हम लोग बालू लादने का काम करते है. लेकिन इस तरह की स्थिति कभी नहीं आयी थी. इस वर्ष ठेकेदार बदले हैं तो प्रशासन के अधिकारियों ने बालू का कारोबार बंद
उदास दिखे बीडीओ
दिन के यही कोई 11 बज रहे थे. प्रखंड कार्यालय में बीडीओ रघुबर प्रसाद आ गये थे. वे अपने कक्ष में बैठे थे. अनमने भाव से संचिकाओं का निष्पादन कर रहे थे. वे सोमवार को हुई दुर्घटना से बेहद दु:खी लग रहे थे. पुलिस प्रशासन की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के कारण निराश थे. उनका कहना है कि वरीय अधिकारियों का आदेश मिलता है. बालू का टेलर रोको. ओवर लोडिंग की जांच करों. लेकिन जब मामला उलझ जाता है तो कोई मदद नहीं मिलती है.
