बेटे के शव के लिए देना पड़ा जिंदा होने का सबूत

एमजेके अस्पताल में 11 जनवरी को इलाज के दौरान बंदी रमेश की हुई थी मौत बेतिया : अपने मृत बंदी पुत्र का शव लेने पहुंचे उसके पिता को पुलिस के समक्ष गिड़गिड़ाना पड़ा. पुलिस पिता को भी मृत घोषित कर चुकी थी. शव गृह में पिता की लाख मिन्नतों के बाद भी पुलिस का दिल […]

एमजेके अस्पताल में 11 जनवरी को इलाज के दौरान बंदी रमेश की हुई थी मौत
बेतिया : अपने मृत बंदी पुत्र का शव लेने पहुंचे उसके पिता को पुलिस के समक्ष गिड़गिड़ाना पड़ा. पुलिस पिता को भी मृत घोषित कर चुकी थी. शव गृह में पिता की लाख मिन्नतों के बाद भी पुलिस का दिल नहीं पसीजा.
आखिरकार पिता को यह लिख कर देना पड़ा कि वह मृत नहीं बल्कि जिंदा है. इसके बाद पुलिस उसे शव देने को तैयार हुई. वाकया एमजेके अस्पताल बेतिया का है.
दरअसल, छपरा जिले के पानपुर थाना क्षेत्र के बसवरिया निवासी रमेश कुमार उर्फ रमेश सहनी को पुलिस ने गिरफ्तार किया. पुलिस को उसे नक्सली होने का संदेह था. 31 अक्तूबर 2013 को उसे छपरा जेल से बगहा उपकारा में बंदी के रूप में भेजा गया था. जहां उसकी तबीयत 28 दिसंबर 2014 के को बिगड़ गयी. अगले दिन कारा प्रशासन उसे बेतिया एमजेके अस्पताल में भरती करा दिया.
वहीं पर उसकी मौत हो गयी. इसकी जानकारी कारा सहायक अखिलेश कुमार सिंह ने दी. उन्होंने बताया कि इससे ज्यादा वे नहीं बता सकते है.
इधर पुत्र की मौत की सूचना मिलने पर पुत्र शव लेने सोमवार को एमजेके अस्पताल पहुंचा. उसने अपनी पहचान मृत कैदी के पिता के रूप में बतायी, लेकिन पुलिस कर्मियों ने उसकी एक न सुनी. उसने कहा, मृत बंदी रमेश कुमार उर्फ रमेश सहनी का ‘मैं पिता लालबाबू सिंह उर्फ हरिहर सहनी हूं , मैं जिंदा हूं’ शव को मुङो सौंप दिया जाय. पिता पुलिस के समक्ष काफी देर तक गुहार लगाता रहा.
इधर, पुलिस अपनी कागजी प्रक्रिया में उसे मृत घोषित कर चुकी थी. बंदी रमेश की मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा हुआ था कि रमेश कुमार उर्फ रमेश सहनी पिता स्व लालबाबू सिंह उर्फ हरिहर सहनी लिखा हुआ था. काफी आरजू मिन्नत के बाद उसके बेटा का शव मृत घोषित बाप लालबाबू सिंह को मिल गया. लेकिन इस प्रक्रिया उसे लिख कर देना पड़ा कि वह जिंदा हैं और वही उसका बाप है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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