सहकारिता से किसानी को कर रहे हैं मजबूत : मंत्री

दी नेशनल सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की वार्षिक सभा में पहुंचे मंत्री ने तमाम योजनाओं की दी जानकारी पैक्स अध्यक्षों को भी मिले पंचायत प्रतिनिधि जैसा सम्मान: भगवती प्रसाद बेतिया : दी नेशनल सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की वार्षिक सभा बुधवार को आयोजित की गयी. इसका उद्घाटन सूबे के सहकारिता मंत्री राणा रणधीर सिंह ने किया. उन्होंने […]

दी नेशनल सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की वार्षिक सभा में पहुंचे मंत्री ने तमाम योजनाओं की दी जानकारी

पैक्स अध्यक्षों को भी मिले पंचायत प्रतिनिधि जैसा सम्मान: भगवती प्रसाद
बेतिया : दी नेशनल सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की वार्षिक सभा बुधवार को आयोजित की गयी. इसका उद्घाटन सूबे के सहकारिता मंत्री राणा रणधीर सिंह ने किया. उन्होंने कहा कि सूबे की सरकार किसानों के विकास के लिये संकल्पित है. सहकारिता को आंदोलन का रूप देकर किसानों को मजबूत करने के लिये अनेक योजनाएं शुरू की जा रहीं हैं. सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारने में कृषि साख सहयोग समितियों से लेकर जिला सहकारिता बैंक की सक्रिय भागीदारी का आह्वान करने के लिये ही मैं आप सबके बीच आया हूं.
सभा की अध्यक्षता जिला सहकारी समिति के चेयरमैन भगवती प्रसाद ने की. उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में निर्वाचित पैक्स अध्यक्षों को पंचायत प्रतिनिधि के जैसे सम्मान दिलाने की मांग की. कहा कि बिहार सहित पूरे देश में किसान और कृषि क्षेत्र के विकास की और जरूरत है. अध्यक्ष ने कहा कि कृषि और किसानों के पंचायत प्रतिनिधियों की यह अनदेखी ठीक नहीं है. सम्मेलन में वाल्मीकिनगर के सांसद बैद्यनाथ प्रसाद महतो, बेतिया के विधायक मदन मोहन तिवारी, एमडी मिथिलेश कुमार आदि ने मुख्य रूप से संबोधित किया. कार्यक्रम में उपाध्यक्ष मोतीलाल प्रसाद, निदेशक पवन सिंह, अनिल पांडेय, नाबार्ड के जिला प्रबंधक गोपाल कुमार, पूर्व अध्यक्ष गिरिंद्र नाथ तिवारी आदि मौजूद रहे.
एनपीए ऋणियों 50 फीसदी तक की छूट, पैक्स अध्यक्षों को भी इनाम : जिला सहकारिता बैंक के चेयरमैन भगवती प्रसाद ने कहा कि आज की आम सभा में केसीसी के एनपीए ऋण वसूली में विशेष छूट देने का प्रस्ताव सर्व सहमति से पारित किया गया है. जिसमें एनपीए केसीसी वाले किसान अपनी देनदारी का 50 फीसदी चुकता कर के भी नो-ड्यूज प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं. वही उनके उत्प्रेरक बने पैक्स अध्यक्षगण को भी जमा राशि का 25 फीसदी इनाम देने का प्रस्ताव पारित किया गया है. ताकि एनपीए (नन पेमेंट्स असेट्स) को कम किया जा सके. निदेशक विकास सिंह ने कहा कि सहकारिता बैंक प्रबंधकों के द्वारा पैक्स अध्यक्षों की अनदेखी बर्दास्त नहीं की जायेगी.

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