चंपारण बन गया एनडीए का गढ़

बेतिया : पश्चिम चंपारण व वाल्मीकिनगर लोक सभा क्षेत्र नब्बे के दशक तक कांग्रेस के अभेद्य दुर्ग माना जाता रहा, लेकिन करीब ढाई दशक में भाजपा के आकर्षण से कांग्रेस का तिलिस्म व अभेद्य दुर्ग टूट गया. वैसे वर्ष 1984 के बाद से यहां के समीकरण प्रत्येक लोकसभा चुनावों में बदलने लगे. इस क्रम में […]

बेतिया : पश्चिम चंपारण व वाल्मीकिनगर लोक सभा क्षेत्र नब्बे के दशक तक कांग्रेस के अभेद्य दुर्ग माना जाता रहा, लेकिन करीब ढाई दशक में भाजपा के आकर्षण से कांग्रेस का तिलिस्म व अभेद्य दुर्ग टूट गया. वैसे वर्ष 1984 के बाद से यहां के समीकरण प्रत्येक लोकसभा चुनावों में बदलने लगे. इस क्रम में बूथ लूट व हिंसा भी होती रही.

हालांकि, इस दौरान कई क्षेत्रीय पार्टियों ने भी मतदाताओं को रिझाने का भरपूर प्रयास किया. इन पार्टियों ने स्थानीय व क्षेत्रीय मुद्दों के कई नारे भी लगाये. लेकिन इनके सभी मुद्दों व नारों पर 1984 में राम के प्रति आस्था इस कदर हावी हुआ कि रूख ही बदल गया और कांग्रेस का यह दुर्ग भाजपा के गढ़ बनता गया.
राजनीतिक पंडितों की मानें तो नब्बे के दशक के बाद कई क्षेत्रीय दलों के गठन हुए और सभी क्षेत्रीय व स्थानीय मुद्दे के बलबूते मतदाताओं को रिझाने लगे. इस क्रम में कई नये समीकरण बनाये गये और वें ध्वस्त होते रहे. इस बीच कतिपय राजनीतिक दलों के नये समीकरण व सामाजिक बंटवारे से कई उतार चढ़ाव आये.
खासकर भौगोलिक कारणों से इलाके में आपराधिक पृष्टभूमि तैयार होने लगी और राजनीतिक संरक्षण के कारण अपराधियों के रहमोकरम पर लोग जीने का बाध्य हो गये. हालांकि यह तिलिस्म तब टूटा जब 1984 में कांग्रेसी नेताओं सिकस्त झेलना पड़ा. इसके बाद समता पार्टी ने अपनी बढ़त बढ़ाई और फिर चंपारण की सीटें एनडीए कोटे में जाने लगी.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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