मंडलकारा के बंदियों ने किया हंगामा व आमरण अनशन

बेतिया : डेढ़ महीने से अधिवक्ताओं द्वारा न्यायालय का बहिष्कार करने से शराब के आरोपितों का न्यायालय द्वारा किसी प्रकार की सुनवाई नहीं होने को लेकर मंगलवार की सुबह बंदियों ने मंडलकारा में जमकर हंगामा किया और आमरण अनशन पर बैठ गए. इस दौरान बंदियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करने लगे. उनका कहना […]

बेतिया : डेढ़ महीने से अधिवक्ताओं द्वारा न्यायालय का बहिष्कार करने से शराब के आरोपितों का न्यायालय द्वारा किसी प्रकार की सुनवाई नहीं होने को लेकर मंगलवार की सुबह बंदियों ने मंडलकारा में जमकर हंगामा किया और आमरण अनशन पर बैठ गए. इस दौरान बंदियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करने लगे. उनका कहना था कि मंडलकारा में 623 बंदियों की क्षमता है. इसके विरुद्ध मंडलकारा में मंगलवार को कुल 1618 बंदियों की उपस्थिति रही.

इनमें शराब से जुड़े आरोप में बंद कुल बंदियों की संख्या 588 रही. इसमें 27 महिला बंदी शामिल हैं. इससे वे जगह के अभाव में रतजगा करने को विवश हैं. साथ ही कभी भी संक्रामक रोगों की आशंका बनी हुई है. बंदियों का कहना था कि जेल में प्रतिदिन शराब के आरोपितों को उत्पाद विभाग एवं पुलिस प्रशासन द्वारा जेल भेजा जाता है. परंतु न्यायालय में किसी प्रकार की सुनवाई नहीं हो रही है. इस कारण इस भीषण गर्मी में जेल के अंदर बंदी भेड़ बकरियों की तरह रहने को अभिशप्त हैं.

यही नहीं जिन बंदियों का जमानत जिला सत्र न्यायाधीश एवं उच्च न्यायालय पटना द्वारा मिला है. उनको भी न्यायालय से रिलीज नहीं होने से मंडलकारा में बंदियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. बंदियों के आंदोलन व जेल में हंगामे के कारण न्यायालय में पेशी के लिए सदर एवं सेशन कोर्ट के लिए पहुंची गाड़ियां घंटे भर जेल गेट पर खड़ी रही.

जेल उपाधीक्षक सह प्रभारी अधीक्षक मिथिलेश कुमार एवं प्रधान लिपिक सुधांशु कुमार ने संयुक्त रूप से बंदियों को समझाया कि शराब के आरोप में बंद सभी बंदी अपने हस्ताक्षरित आवेदन जिला सत्र न्यायाधीश या जिला पदाधिकारी के नाम से दें. उसे जेल प्रशासन की ओर से अग्रसारित कर संबंधित न्यायालय में भेजा जाएगा. तब जाकर बंदी शांत हुए और सामान्य बंदियों न्यायालय उपस्थिति के लिए भेजा जा सका.

पेशी के लिए जानेवाले बंदियों को रोका
मंडलकारा में बंदियों के आंदोलन व हंगामा के कारण कोर्ट में पेशी के लिए जाने वाले बंदियों को घंटों रूकना पड़ा. बंदी आंदोलन के दौरान जेल गेट को जाम कर आमरण अनशन पर बैठ गये थे. इस कारण न्यायालय में पेशी के लिए सदर व सेशन कोर्ट के लिए बंदियों को ले जाने वाले वाहन घंटों जेल गेट पर ही खड़े रहे. हालांकि बाद में मंडलकारा प्रशासन के समझाने पर बंदी शांत हुए और बंदियों को कोर्ट में पेशी के लिए ले जाया जा सका.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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