Siwan AK47 Firing: क्या पुलिस प्रदर्शनकारियों पर चला सकती है AK-47? समझिए पूरी कानूनी प्रक्रिया

Siwan AK47 Firing: बिहार के सीवान में NEET पेपर लीक के विरोध में जुटे छात्रों पर कथित AK-47 से फायरिंग के वीडियो ने बड़ा राजनीतिक बवाल खड़ा कर दिया है. तेजस्वी यादव के आरोपों के बाद पुलिसकर्मी सस्पेंड हुआ और जांच जारी है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या भीड़ पर AK-47 चलाना कानूनी रूप से सही है?

Siwan AK47 Firing: बिहार के सीवान में NEET पेपर लीक के खिलाफ छात्र सड़क पर उतरकर विरोध जता रहे थे. इसी दौरान एक वीडियो सामने आया जिसमें AK-47 जैसी घातक राइफल से फायरिंग होती दिख रही है. इस वीडियो के सामने आते ही मामले ने तूल पकड़ लिया.

विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने इसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए. विवाद बढ़ता देख एक पुलिस अधिकारी को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया और पूरे मामले की विभागीय जांच बैठा दी गई है.

क्या पुलिस प्रदर्शन कर रही भीड़ पर AK-47 चला सकती है?

भारतीय कानून का इस पर सीधा जवाब है- नहीं. सामान्य परिस्थितियों में किसी भी प्रदर्शन या भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस AK-47 या अन्य किसी जानलेवा हथियार का इस्तेमाल नहीं कर सकती.

भारत का संविधान नागरिकों को बिना हथियार शांतिपूर्वक जुटने का हक देता है. अगर प्रदर्शन हिंसक भी हो जाए, तब भी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और पुलिस मैनुअल के मुताबिक पुलिस मनमाने तरीके से गोलियां नहीं चला सकती.

भीड़ को संभालने के लिए पुलिस को अपनाने पड़ते हैं ये 4 कदम

कानून के मुताबिक पुलिस को भीड़ हटाने के लिए एक तय प्रक्रिया का पालन करना होता है. सबसे पहले प्रदर्शनकारियों को लाउडस्पीकर से हटने की चेतावनी दी जाती है और बात करके समझाने की कोशिश होती है. अगर लोग न मानें तो पानी की बौछार, आंसू गैस या स्मोक शेल का इस्तेमाल होता है.

इसके बाद भी भीड़ न हटने पर लाठीचार्ज, रबर बुलेट या प्लास्टिक बुलेट चलाई जाती है. जानलेवा गोलियों का इस्तेमाल केवल तब होता है जब भीड़ इतनी हिंसक हो जाए कि किसी की जान बचाने का कोई और रास्ता न बचे.

आखिर भीड़ नियंत्रण में AK-47 का इस्तेमाल क्यों गलत है?

AK-47 एक असॉल्ट राइफल है जिसे युद्ध और बेहद गंभीर सुरक्षा स्थितियों के लिए बनाया गया है. इससे निकलने वाली गोली की रफ्तार और क्षमता इतनी अधिक होती है कि वह एक इंसान के शरीर को पार करके पीछे खड़े किसी बेकसूर को भी लग सकती है.

इसमें किसी एक लक्ष्य को सटीक तरीके से निशाना बनाना मुश्किल होता है. यही वजह है कि इसे भीड़ पर चलाना खतरनाक है. संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जीवन का अधिकार देता है, इसलिए बिना वजह ऐसा घातक बल प्रयोग असंवैधानिक है.

बिहार की ताजा खबरों के लिए क्लिक करें

तो फिर AK-47 का इस्तेमाल कब और कौन कर सकता है?

AK-47 का इस्तेमाल केवल असाधारण स्थितियों में ही संभव है. अगर प्रदर्शनकारी खुद हथियारबंद हो जाएं, पुलिस पर गोलियां बरसाने लगें या कोई आतंकवादी हमला जैसी स्थिति बन जाए, तब पुलिस आत्मरक्षा में हथियार चला सकती है. इसे भीड़ नियंत्रण नहीं बल्कि सेल्फ डिफेंस माना जाता है.

भारत में AK-47 प्रतिबंधित हथियार की श्रेणी में आता है. इसे आम नागरिक नहीं रख सकते. यह केवल सेना, एनएसजी, स्पेशल कमांडो और अधिकृत सुरक्षा बलों को ही जारी किया जाता है.



प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By परितोष शाही

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >